US-Iran Meeting: अमेरिका और ईरान की बातचीत टूटी, इस्लामाबाद में 21 घंटे चली मीटिंग के बाद भी नहीं बनी बात
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी मीटिंग के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। पाकिस्तान की मेजबानी में हुई इस मुलाकात में दोनों तरफ से बहुत सारी शर्तें रखी गईं, जिसकी वजह से यह बातचीत बीच में ही अटक गई।
बातचीत क्यों फेल हुई और ईरान की क्या मांगें थीं?
ईरान की सरकारी मीडिया IRNA के मुताबिक, अमेरिका ने ऐसी मांगें रखीं जो बहुत ज्यादा थीं और जिन्हें मानना मुश्किल था। ईरान चाहता था कि इजराइल हिजबुल्लाह पर हमले बंद करे और उसके 6 अरब डॉलर के जमा पैसे वापस मिलें। ईरान की मुख्य मांगें नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं:
| ईरान की मुख्य मांगें |
|---|
| इजराइल हिजबुल्लाह पर हमले बंद करे |
| 6 अरब डॉलर के फ्रोजन एसेट्स वापस मिलें |
| परमाणु कार्यक्रम के लिए गारंटी मिले |
| Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स लेने का हक मिले |
अमेरिका ने क्या शर्तें रखीं और उसका क्या स्टैंड रहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। अमेरिका चाहता था कि ईरान लिखित में यह वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें बनाने की क्षमता रखेगा। JD Vance ने कहा कि अमेरिका ने पूरी ईमानदारी से कोशिश की लेकिन ईरान ने उनकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह विफलता अमेरिका के मुकाबले ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है।
मीटिंग में कौन शामिल था और पाकिस्तान की क्या भूमिका रही?
इस हाई-लेवल मीटिंग में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff और Jared Kushner मौजूद थे। वहीं ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Baqer Qalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araqchi आए थे। पाकिस्तान ने इस पूरी बातचीत की मेजबानी की। मीटिंग टूटने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि पाकिस्तान भविष्य में भी शांति के लिए कोशिशें जारी रखेगा।




