Middle East Tension: रूस और चीन ने पेश किया नया प्रस्ताव, वोटिंग का फैसला अब जमीनी हालात पर टिका
रूस और चीन ने मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर वोटिंग कब होगी, यह पूरी तरह से वहां के जमीनी हालात पर निर्भर करेगा। रूस के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को साफ किया है कि जब तक स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।
रूस और चीन के प्रस्ताव में क्या खास है?
रूस और चीन चाहते हैं कि मिडिल ईस्ट में चल रही लड़ाई को तुरंत रोका जाए। दोनों देश एक ऐसा रास्ता निकालना चाहते हैं जिससे क्षेत्र में शांति आए और बातचीत के जरिए मसले हल हों। इसके लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 और 15 अप्रैल को चीन का दौरा करेंगे। वहां वे चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक करेंगे और तय करेंगे कि आगे क्या कदम उठाने हैं।
खाड़ी देशों के प्रस्ताव को क्यों रोका गया?
7 अप्रैल को बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरक्षा के लिए एक प्रस्ताव रखा था, लेकिन रूस और चीन ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर इसे रोक दिया। रूस के प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़्या ने कहा कि वह प्रस्ताव संतुलित नहीं था और उसने अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को नजरअंदाज किया था। वहीं चीनी प्रतिनिधि फु कोंग ने इसे एकतरफा बताया और कहा कि समस्या का समाधान बातचीत से ही निकलेगा।
महत्वपूर्ण तारीखें और घटनाएं
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 5-6 अप्रैल 2026 | चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच फोन पर बातचीत हुई। |
| 7 अप्रैल 2026 | रूस और चीन ने खाड़ी देशों के समुद्री सुरक्षा प्रस्ताव को वीटो कर खारिज कर दिया। |
| 8 अप्रैल 2026 | रूस और चीन ने युद्ध रोकने के लिए एक वैकल्पिक प्रस्ताव लाने की योजना बनाई। |
| 13 अप्रैल 2026 | रूस ने बताया कि प्रस्ताव पर वोटिंग अब जमीनी हालात के आधार पर होगी। |
| 14-15 अप्रैल 2026 | सर्गेई लावरोव चीन दौरे पर जाएंगे और वांग यी से मुलाकात करेंगे। |




