आंध्र प्रदेश के डॉ. बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिले का एक शांत ग्रामीण इलाका उस वक्त दहशत से भर गया, जब वहां ओएनजीसी (ONGC) से जुड़ी परियोजना के एक गैस कुएं में अचानक रिसाव के बाद भीषण धमाका हुआ। आसमान में उठती आग की ऊंची लपटें और काले धुएं के गुबार ने पूरे मोरी गांव को अपनी चपेट में ले लिया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि दूर-दूर तक लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पूरे क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है।
तकनीकी खामी से बिगड़ा गैस का दबाव और देखते ही देखते आग के गोले में तब्दील हो गया कुआं
यह घटना मोरी गांव में स्थित ‘मोरी-5’ नामक गैस कुएं पर हुई, जिसका संचालन दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। यह कुआं ओएनजीसी की एक परियोजना का अहम हिस्सा है। घटना के कारणों पर शुरुआती जांच में सामने आया है कि तकनीकी गड़बड़ी के चलते कुएं में गैस का दबाव अचानक असंतुलित हो गया। इसी अनियंत्रित दबाव के कारण पहले गैस का रिसाव हुआ और फिर अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। हालांकि, प्रशासन और कंपनी के लिए राहत की बात यह है कि किसी भी कर्मचारी या ग्रामीण को शारीरिक चोट नहीं आई है।
रिहायशी इलाके से दूर होने की वजह से टला बड़ा हादसा, ओएनजीसी ने तैनात की क्राइसिस मैनेजमेंट टीम
इस घटना को लेकर ओएनजीसी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि यह हादसा वर्कओवर ऑपरेशन के दौरान हुआ। 5 जनवरी को ऑपरेटर ने ओएनजीसी को गैस रिसाव की जानकारी दी थी। कंपनी के अनुसार, राहत की बात यह है कि यह कुआं एक दूरस्थ इलाके में स्थित है और इसके 500 से 600 मीटर के दायरे में कोई भी इंसानी बस्ती मौजूद नहीं है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने से बच गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ओएनजीसी ने अपनी क्राइसिस मैनेजमेंट टीमों (CMT और RCMT) को तत्काल प्रभाव से मौके पर तैनात कर दिया है। प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर कूलिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। आग बुझाने और कुएं को कैप (बंद) करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के वेल-कंट्रोल विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। साथ ही नरसापुरम और आसपास के क्षेत्रों से अतिरिक्त उपकरण मंगाए गए हैं ताकि जल्द से जल्द हालात सामान्य किए जा सकें।
जान बचाने के लिए बदहवास भागते दिखे लोग, प्रशासन ने एहतियातन काट दी पूरे इलाके की बिजली
धमाके और आग की लपटों ने आसपास के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी। लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर दौड़ते देखे गए। खतरे को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। गैस रिसाव के जोखिम को देखते हुए आसपास के इलाकों को खाली कराया गया और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। किसी भी तरह की चिंगारी से आग और न भड़के, इसके लिए पूरे इलाके की बिजली सप्लाई तुरंत काट दी गई। इसके अलावा, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इलाके में रसोई गैस के इस्तेमाल पर भी अस्थायी रोक लगा दी है।
पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश जारी
हादसे की खबर मिलते ही राजाहमुंद्री से ओएनजीसी के वरिष्ठ अधिकारी और फायर सेफ्टी टीमें मोरी गांव पहुंच गईं। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता गैस पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर है। यदि आग या धमाके से पाइपलाइन को नुकसान पहुंचता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। यही कारण है कि पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है। ओएनजीसी, जिसका कृष्णा गोदावरी बेसिन और पूर्वी गोदावरी जिले में बड़ा नेटवर्क है, इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक तकनीकी टीमें पूरे क्षेत्र को सुरक्षित घोषित नहीं कर देतीं, तब तक लोगों को वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।





