ईरान को मिला नया सर्वोच्च नेता, अर्मेनिया के PM ने मुज्तबा खामेनेई को दी बधाई
ईरान में सत्ता के बड़े बदलाव के बीच अब नए सुप्रीम लीडर के नाम का आधिकारिक ऐलान हो गया है। दिवंगत आयतुल्ला अली खामेनेई के 56 वर्षीय बेटे आयतुल्ला मुज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। इस घोषणा के तुरंत बाद अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने उन्हें बधाई संदेश भेजा है। पशिन्यान ने उम्मीद जताई है कि मुज्तबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान और अर्मेनिया के बीच संबंध और भी मजबूत होंगे और दोनों देश नए मुकाम हासिल करेंगे।
ईरान में कैसे हुआ नए सुप्रीम लीडर का चुनाव
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत नए नेता का चयन किया गया है। 8 मार्च 2026 को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस परिषद में कुल 88 सदस्य शामिल हैं जिन्होंने वोटिंग के जरिए मुज्तबा खामेनेई के नाम पर अपनी सहमति दी। अली खामेनेई के निधन के बाद खाली हुए इस पद के लिए मुज्तबा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। इस नियुक्ति के बाद ईरान की सेना यानी IRGC ने भी नए लीडर के प्रति अपनी वफादारी का संकल्प लिया है।
दुनिया भर से मिली प्रतिक्रिया और बाज़ार पर असर
ईरान में इस नेतृत्व परिवर्तन का असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। जहां अर्मेनिया और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं अमेरिकी प्रशासन ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया है। इस राजनीतिक हलचल के कारण वैश्विक तेल बाज़ार में भी भारी उछाल देखा गया है। 9 मार्च 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| नए सुप्रीम लीडर का नाम | आयतुल्ला मुज्तबा खामेनेई |
| चुनाव की तारीख | 8 मार्च 2026 |
| चुनाव करने वाली संस्था | असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स |
| कच्चे तेल की कीमत | 120 डॉलर प्रति बैरल |
| बधाई देने वाले देश | अर्मेनिया और रूस |
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका प्रभाव
ईरान में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी अहम होता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर यात्रा खर्च और अन्य ज़रूरी सामानों के दाम पर पड़ सकता है। फिलहाल ईरान के भीतर राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान और संसद के स्पीकर ने नए नेतृत्व को अपना समर्थन दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि नए सुप्रीम लीडर के आने के बाद ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों में क्या बदलाव आते हैं।




