Bushehr Nuclear Plant के पास हुए हमले से बढ़ी टेंशन, रूस और ईरान ने दी चेतावनी, खाड़ी देशों में परमाणु खतरे का डर.
ईरान के Bushehr परमाणु संयंत्र के पास हाल के दिनों में हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है. रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बात करके इन हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है. अधिकारियों का कहना है कि अगर परमाणु प्लांट के मुख्य हिस्से को नुकसान पहुँचता है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैल सकता है. इससे न केवल ईरान बल्कि पास के दुबई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में रहने वाले लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
Bushehr परमाणु प्लांट पर हुए हमलों का अब तक का रिकॉर्ड
- 28 फरवरी 2026: इस क्षेत्र में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई थी.
- 18 मार्च 2026: परमाणु रिएक्टर से मात्र 350 मीटर की दूरी पर एक गोला गिरा था जिससे डर का माहौल बन गया था.
- 4 अप्रैल 2026: प्लांट की बाउंड्री के पास हमला हुआ जिसमें एक सुरक्षा कर्मचारी की मौत हो गई और एक बिल्डिंग को नुकसान पहुँचा.
- 5 अप्रैल 2026: रूस और ईरान ने इन हमलों को गैर-कानूनी बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज़ उठाई है.
रूस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने क्या कदम उठाए हैं
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे एक बड़ा अपराध बताया है. रूस की परमाणु कंपनी Rosatom ने अपने कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है क्योंकि हालात काबू से बाहर हो रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि परमाणु प्लांट पर हमला होने से आने वाली कई पीढ़ियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने भी अपील की है कि परमाणु ठिकानों को युद्ध के बीच निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि इससे पूरे पर्यावरण को खतरा है.
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा
| खतरे का प्रकार | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| रेडियोधर्मी रिसाव | हवा के जरिए प्रदूषण दुबई और मस्कट तक पहुँच सकता है |
| समुद्री पानी | समुद्र का पानी दूषित होने से पीने के पानी की किल्लत हो सकती है |
| स्वास्थ्य जोखिम | कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है |
| पलायन | सुरक्षा कारणों से प्रवासियों को इलाका छोड़ना पड़ सकता है |




