अमेरिका ने ईरान के सिविलियन पुल को उड़ाया, चीन ने की कड़ी निंदा, कहा अंतरराष्ट्रीय कानून का हुआ उल्लंघन
ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद अब चीन खुलकर विरोध में आ गया है। चीन ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें पूरी तरह से गैर-कानूनी बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने खुद स्वीकार किया है कि ईरान पर बातचीत के लिए दबाव बनाने के इरादे से एक नागरिक पुल को निशाना बनाया गया है। इस घटना ने दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
ईरान के पुल पर हमले से जुड़ी बड़ी बातें क्या हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान के एक महत्वपूर्ण नागरिक पुल को नष्ट कर दिया है। यह हमला ईरान पर दबाव बनाने के लिए किया गया था ताकि वह समझौते के लिए तैयार हो सके। ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो बिजली घरों और अन्य पुलों पर और भी हमले किए जाएंगे। ईरान के कराज के पास स्थित B1 पुल पर हुए इस हमले के कारण वहां की मीडिया ने भारी नुकसान की बात कही है।
| स्थान | मरने वालों की संख्या | घायलों की संख्या | मुख्य नुकसान |
|---|---|---|---|
| B1 Bridge, Karaj | 8 | 95 | नागरिक बुनियादी ढांचा |
चीन और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का इस पर क्या रुख है?
चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए ये सैन्य ऑपरेशन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना हुए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। चीन के संयुक्त राष्ट्र दूत Fu Cong ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह से बल का इस्तेमाल करने से स्थिति और भी बिगड़ सकती है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल और रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं ने भी नागरिक संपत्तियों पर हमले को लेकर गहरी चिंता जताई है।
- Mao Ning ने सभी पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की अपील की है।
- 100 से अधिक अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञों ने इन हमलों को संभावित युद्ध अपराध माना है।
- ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे की तबाही से ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
- चीन ने मानवीय आपदा को रोकने के लिए राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है।




