Iran-US War: चीन ने कहा हालात अब बेहद गंभीर, Strait of Hormuz में अमेरिकी सेना ने लगाया नाकाबंदी का पहरा
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की स्थिति अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है. चीन ने इस हालात को एक ‘क्रिटिकल क्रॉसरोड्स’ बताया है क्योंकि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह फेल हो चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नौसेना द्वारा नाकाबंदी का आदेश दिया है जिससे तनाव और बढ़ गया है.
ईरान और अमेरिका के बीच क्या हुआ और क्यों बढ़ा तनाव?
अप्रैल 2026 में वाशिंगटन में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची और डेडलॉक की स्थिति बन गई. इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार से Strait of Hormuz में नेवल ब्लॉकेड लागू करने का आदेश दिया. ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को खारिज कर दिया है और समुद्री रास्ते की नाकाबंदी हटाने से मना कर दिया है. इस तनाव के बीच ईरान ने UAE के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमले किए हैं.
चीन का क्या रुख है और उसने क्या प्रस्ताव दिए?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विवाद पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए एक चार-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया. चीन और पाकिस्तान ने मिलकर एक ‘पांच-सूत्रीय पहल’ भी शुरू की है जिसमें युद्धविराम और शांति की अपील की गई है. वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि वह ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम या हथियार भेज रहा है.
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
सऊदी अरब और अन्य इस्लामिक देशों ने ईरान से अपील की है कि वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों के रास्ते में कोई रुकावट न डाले. खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार का मुख्य रास्ता है. अगर यहाँ तनाव बढ़ा तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है और इसका सीधा असर खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों के खर्चों और व्यापार पर पड़ सकता है.




