UNSC में चीन का बड़ा बयान, खाड़ी देशों के मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं, शांति के लिए उठाया कदम.
चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी देशों का मजबूती से समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने स्पष्ट किया है कि वे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के सख्त खिलाफ हैं। इस मुद्दे पर चीन ने सऊदी अरब और बहरीन के विदेश मंत्रियों से फोन पर विशेष चर्चा की है और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की है।
चीन और खाड़ी देशों के बीच हुई बातचीत के मुख्य बिंदु
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन और सऊदी अरब के अपने समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत के दौरान चीन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और वह किसी भी तरह की आक्रामकता का विरोध करता है। खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए चीन और भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
- सऊदी अरब के साथ चर्चा: चीनी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद से क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात की।
- बहरीन की भूमिका: बहरीन फिलहाल GCC का अध्यक्ष है और उसने सुरक्षा परिषद में चीन के साथ समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई है।
- समुद्री सुरक्षा: Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
चीन और पाकिस्तान की 5 सूत्री शांति योजना
मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए चीन और पाकिस्तान ने मिलकर एक पांच सूत्री पहल का प्रस्ताव दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नागरिकों पर हमलों को रोकना और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। चीन ने सुरक्षा परिषद से आग्रह किया है कि वह युद्ध जैसी स्थितियों को बढ़ावा न देकर शांति वार्ता को सुविधाजनक बनाए।
| पहल का विषय | विवरण |
|---|---|
| 5-पॉइंट इनिशिएटिव | शांति और स्थिरता के लिए चीन-पाकिस्तान की संयुक्त योजना |
| सुरक्षा परिषद की भूमिका | तनाव कम करने और अवैध सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर जोर |
| व्यापारिक मार्ग | Strait of Hormuz में सामान्य शिपिंग को बहाल करना |
विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि चीन खाड़ी देशों की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंतित है। उनका मानना है कि बिना अनुमति के की गई सैन्य कार्रवाइयों को कानूनी मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। बहरीन ने भी इस बात पर जोर दिया है कि खाड़ी देशों के सामने इस समय सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां हैं जिनका समाधान अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है।




