राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक के दबाव को कम करने और संकरी गलियों तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा पहुंचाने के लिए एक अहम और व्यावहारिक योजना तैयार की गई है। दिल्ली की सड़कों पर अब तक दौड़ रही 9 मीटर और 12 मीटर की बसों के बाद, अब 7 मीटर लंबी ‘मिनी इलेक्ट्रिक बसें’ उतारने की तैयारी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन रिहायशी इलाकों और कॉलोनियों को मुख्य धारा के ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ना है, जहां जगह की कमी के कारण अब तक बड़ी बसें प्रवेश नहीं कर पाती थीं। सरकार की यह योजना न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को घर-घर तक पहुंचाने में भी मदद करेगी।
सड़कों की चौड़ाई और जरूरत के हिसाब से खरीदी जाएंगी 3,330 नई इलेक्ट्रिक बसें, बेड़े में शामिल होंगे तीन अलग-अलग मॉडल
परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 3,330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया है। खास बात यह है कि ये सभी बसें एक ही आकार की नहीं होंगी, बल्कि इन्हें सड़कों की चौड़ाई और यात्रियों की भीड़ के हिसाब से चुना जाएगा। इस योजना के तहत सबसे ज्यादा संख्या 9 मीटर लंबी बसों की होगी, जिनकी संख्या 2,330 प्रस्तावित है। वहीं, मुख्य मार्गों और हैवी ट्रैफिक वाले रूट्स के लिए 12 मीटर लंबी 500 बसें खरीदी जाएंगी। सबसे बड़ा बदलाव 7 मीटर लंबी 500 मिनी बसों के रूप में देखने को मिलेगा, जो संकरी सड़कों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी की समस्या होगी खत्म, बुजुर्गों और छात्रों के लिए वरदान साबित होंगी ‘मिनी बसें’
दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं जहां मेट्रो या मुख्य बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए लोगों को ई-रिक्शा या ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता है। नई 7 मीटर लंबी मिनी बसों को विशेष रूप से इसी ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ की समस्या को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये बसें घनी आबादी वाली कॉलोनियों के अंदर तक जा सकेंगी। इससे सबसे बड़ी राहत बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों को मिलेगी, जिन्हें अब बस पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। यह कदम दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में उठाया गया है।
प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में मिलेगी बड़ी मदद, पूरी तरह से ई-बसों पर शिफ्ट होने से सुधरेगी दिल्ली की हवा
प्रस्तावित सभी नई बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी, जो दिल्ली के पर्यावरण के लिए एक सुखद संकेत है। डीजल और सीएनजी बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसें न केवल शून्य उत्सर्जन करती हैं, बल्कि आवाज भी कम करती हैं। इन बसों के सड़क पर उतरने से हवा में जहरीले धुएं की मात्रा कम होगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर राजधानी के प्रदूषण स्तर पर पड़ेगा। साथ ही, ईंधन पर होने वाले भारी-भरकम खर्च में भी कटौती होगी, जिससे यह परिवहन मॉडल आर्थिक रूप से भी टिकाऊ साबित होगा।
निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य, पहले से सड़कों पर दौड़ रही हैं पांच हजार से ज्यादा बसें
वर्तमान में दिल्ली की सड़कों पर कुल 5,336 सरकारी बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 1,162 बसें 9 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें हैं। नई खेप के जुड़ने के बाद इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में भारी इजाफा होगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 5,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें नियमित रूप से चलें। प्रशासन का मानना है कि जब लोगों को अपने घर के पास से ही आरामदायक और वातानुकूलित बस सेवा मिलेगी, तो वे अपने निजी वाहनों का उपयोग कम करेंगे। इससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या तो सुलझेगी ही, साथ ही पार्किंग की मारामारी भी कम होगी।





