दिल्ली: अब हर जिले में बनेंगे महिला हॉस्टल, बजट में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए घोषणा
देश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा और रोजगार के लिए आने वाली महिलाओं और छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय बजट में सरकार ने दिल्ली में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए आवास की समस्या को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अक्सर दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाली महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित और किफायती घर ढूंढने की होती है, लेकिन अब सरकार की नई योजना से यह राह आसान होने वाली है।
दिल्ली के हर जिले में बनेंगे नए हॉस्टल, छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर सरकार का बड़ा फोकस
बजट में की गई घोषणा के अनुसार, अब दिल्ली के प्रत्येक जिले में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष हॉस्टल बनाए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके कार्यस्थल या कॉलेज के नजदीक ही सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। दिल्ली जैसे महानगर में जहां हर जिले की अपनी अलग जनसांख्यिकी और जरूरतें हैं, वहां हर जिले में हॉस्टल की सुविधा होने से महिलाओं को लंबी दूरी तय करने (कम्प्यूटिंग) की समस्या से भी निजात मिलेगी। इससे न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि वे सुरक्षित माहौल में रहकर अपने करियर और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
निजी पीजी संचालकों की मनमानी और महंगे किराए से मिलेगी मुक्ति, जेब पर पड़ने वाला बोझ होगा कम
वर्तमान में दिल्ली में रहने वाली ज्यादातर छात्राएं और कामकाजी महिलाएं निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) या किराए के कमरों पर निर्भर हैं। निजी पीजी संचालक अक्सर मनमाना किराया वसूलते हैं, और सुरक्षा के नाम पर कई बार पर्याप्त इंतजाम नहीं होते। इसके अलावा, बिजली बिल और अन्य चार्जेज के नाम पर भी उनसे अतिरिक्त पैसे लिए जाते हैं। सरकारी हॉस्टल बनने से महिलाओं को निजी पीजी की इस मनमानी से मुक्ति मिलेगी। ये नए हॉस्टल किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों और कम आय वाली कामकाजी महिलाओं को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाओं के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम
सरकार द्वारा बनाए जाने वाले इन हॉस्टलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे, जो अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता होती है। सुरक्षित आवास की उपलब्धता से महिला कार्यबल की भागीदारी (Workforce Participation) को भी बढ़ावा मिलेगा। कई बार सुरक्षित जगह न मिल पाने के कारण परिवार अपनी बेटियों को दिल्ली भेजने से कतराते हैं, लेकिन हर जिले में सरकारी हॉस्टल होने से यह डर खत्म होगा। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें देश की राजधानी में अपनी जगह बनाने के लिए प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित होगी। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक व्यावहारिक और जरूरी कदम माना जा रहा है।