Strait of Hormuz Blockade: डोनाल्ड ट्रम्प ने किया बड़ा ऐलान, ईरान की वजह से अमेरिकी नौसेना करेगी समुद्री रास्ते की नाकाबंदी
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि अमेरिकी नौसेना अब Strait of Hormuz को ब्लॉक करना शुरू करेगी। यह कदम पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई शांति वार्ता के फेल होने के बाद उठाया गया है। इस फैसले से दुनिया भर में तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ℹ: अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का किया ऐलान, बढ़ा तनाव।
अमेरिकी नौसेना क्या कदम उठाएगी और क्यों
राष्ट्रपति Donald Trump ने Truth Social पर जानकारी दी कि नौसेना अब इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों की जांच करेगी। खास तौर पर उन जहाजों को रोका जाएगा जिन पर ईरान के साथ आर्थिक या लॉजिस्टिक लेन-देन का शक है। उन्होंने आदेश दिया है कि जिन जहाजों ने ईरान को टोल का भुगतान किया है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल में रोका और जब्त किया जाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी सेना समुद्र में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नष्ट करने का काम भी शुरू करेगी।
इस विवाद की पूरी टाइमलाइन और मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 19 मार्च 2026 | ईरानी ठिकानों पर अमेरिका ने हवाई हमले शुरू किए |
| 8 अप्रैल 2026 | अमेरिका और ईरान के बीच सशर्त युद्धविराम हुआ |
| 11 अप्रैल 2026 | अमेरिकी सेना ने Strait को साफ करने का अभियान शुरू किया |
| 11-12 अप्रैल 2026 | इस्लामाबाद में शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हुई |
| 12 अप्रैल 2026 | Donald Trump ने नाकाबंदी का ऐलान किया |
| 22 अप्रैल 2026 | मौजूदा युद्धविराम की अंतिम तारीख |
| वर्तमान स्थिति | रूस ने मध्यस्थता की पेशकश की और चीन ने UN प्रस्ताव को वीटो किया |
दुनिया और खाड़ी देशों पर इसका क्या असर होगा
Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम रास्ता है। अगर यहाँ नाकाबंदी जारी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इससे न केवल अमेरिका और ईरान, बल्कि UAE और अन्य खाड़ी देशों के व्यापार पर भी सीधा असर पड़ेगा। उप राष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया, इसलिए अब सेना पूरी तरह तैयार है।




