Egypt President Sisi: मिस्र के राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था को लेकर दिया बयान, कालाबाज़ारी करने वाले जाएंगे मिलिट्री कोर्ट
मिस्र (Egypt) के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी ने 9 मार्च 2026 को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम बयान दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर मिस्र की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा. उन्होंने याद दिलाया कि अक्टूबर 2023 के बाद से देश को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. राष्ट्रपति ने साफ किया कि अभी देश की अर्थव्यवस्था ‘सेफ जोन’ में है और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है.
महंगे सामान बेचने वालों पर मिलिट्री कोर्ट का खतरा
देश में बढ़ रही महंगाई को रोकने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है. राष्ट्रपति सिसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो व्यापारी बाजार में कालाबाज़ारी कर रहे हैं या मनमाने दाम पर सामान बेच रहे हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए. ऐसे लोगों को मिलिट्री कोर्ट (Military Courts) भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि बाजार में आम जनता को सही दाम पर राशन मिल सके. उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया है कि बुनियादी जरूरतों के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
युद्ध से मिस्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ा भारी असर
गाजा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण मिस्र को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. सबसे ज्यादा असर स्वेज नहर (Suez Canal) की कमाई पर दिखा है. अक्टूबर 2023 से अब तक करीब 10 अरब डॉलर का भारी नुकसान हो चुका है. विदेशी निवेश कम होने से मिस्र की करेंसी (Egyptian pound) भी काफी कमजोर हुई है. नीचे दिए गए टेबल में आप देश के आर्थिक हालात के ताजा आंकड़े देख सकते हैं.
| आर्थिक आंकड़े | विवरण |
|---|---|
| स्वेज नहर का नुकसान | अक्टूबर 2023 से करीब 10 अरब डॉलर का घाटा |
| करेंसी का हाल | एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 50.2 मिस्र पाउंड (8 महीने के निचले स्तर पर) |
| विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Reserves) | लगभग 52.6 अरब डॉलर |
| प्रवासियों की भेजी रकम (Remittances) | रिकवर होकर 41.5 अरब डॉलर पर पहुंची |
तनाव कम करने की कोशिश में जुटा है मिस्र
इस समय मिस्र अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का काम कर रहा है ताकि युद्ध को किसी भी तरह रोका जा सके. सरकार को चिंता है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो जाता है तो दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ जाएंगे. इससे मिस्र का आयात बिल भी काफी महंगा हो जाएगा. फिलहाल सरकार वर्ल्ड बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि आने वाले समय में किसी भी तरह के आर्थिक झटके से देश को बचाया जा सके.





