मिस्र के राष्ट्रपति ने किया अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत, खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए दिया बड़ा भरोसा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की खबर ने दुनिया को राहत दी है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी ने इस फैसले का दिल से स्वागत किया है और इसे लाखों लोगों के लिए सुकून भरा बताया है। राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपने खाड़ी सहयोगियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह युद्धविराम 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है और अब सबकी नजरें पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।
शांति वार्ता और युद्धविराम से जुड़ी मुख्य बातें क्या हैं?
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत को लेकर कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- बातचीत की शुरुआत: इस्लामाबाद में शुक्रवार 10 अप्रैल 2026 से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय चर्चा शुरू होगी।
- ईरान का पक्ष: ईरान ने 10 सूत्री प्रस्ताव दिया है, जिसे अमेरिका ने बातचीत के लिए एक आधार माना है। इसमें प्रतिबंधों में ढील और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की बात शामिल है।
- अमेरिका की शर्त: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ किया है कि युद्धविराम तभी काम करेगा जब ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और तुरंत खोलने की गारंटी देगा।
- मिस्र का स्टैंड: राष्ट्रपति अल-सीसी ने सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन और इराक को बिना शर्त समर्थन देने की बात दोहराई है।
इस शांति पहल का खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
मिस्र के राष्ट्रपति का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने से लाखों लोगों की जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। खाड़ी देशों में काम करने वाले करोड़ों प्रवासी, जिनमें भारतीय भी शामिल हैं, उनके लिए यह शांति बहुत मायने रखती है क्योंकि किसी भी युद्ध का असर सीधे तौर पर नौकरी और व्यापार पर पड़ता है। मिस्र ने उम्मीद जताई है कि यह दो हफ्ते का युद्धविराम एक स्थायी समझौते का रास्ता खोलेगा। हालांकि, ईरान की सुरक्षा परिषद ने कहा है कि वह अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते और यह बातचीत युद्ध खत्म होने की गारंटी नहीं है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनका हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।




