अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को ‘हासिल करने’ की धमकी देने के बाद, यूरोपीय देशों ने आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है। 15 और 16 जनवरी 2026 को डेनमार्क के नेतृत्व में शुरू हुए ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ के तहत जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे देशों के सैनिक ग्रीनलैंड की राजधानी नूक पहुंच गए हैं। यह मिशन न केवल सैन्य अभ्यास है, बल्कि इसे अमेरिका के इरादों के खिलाफ एक रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
1. ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस की शुरुआत
डेनमार्क ने अपने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर इस ऑपरेशन की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति को बढ़ाना है। 15 और 16 जनवरी को हुए इस रैपिड मिशन में यूरोपीय देशों के छोटे सैन्य दस्तों ने विमान के जरिए ग्रीनलैंड में लैंडिंग की। यह मिशन इस बात का सबूत है कि यूरोप जरूरत पड़ने पर नाटो कमान के बिना भी अपनी सुरक्षा के लिए तेजी से सेना तैनात कर सकता है। इस मिशन में फिलहाल अमेरिका और कनाडा के सैनिक शामिल नहीं हैं।
2. ग्रीनलैंड में तैनात सैनिकों का विवरण
इस शुरुआती दो दिवसीय मिशन के लिए अलग-अलग देशों ने अपने विशेष सैन्य दस्तों को भेजा है। नीचे दी गई तालिका में बताया गया है कि किस देश से कितने सैनिक और अधिकारी इस मिशन का हिस्सा बने हैं:
| देश का नाम | सैनिकों/अधिकारियों की संख्या | विशेष विवरण |
|---|---|---|
| फ्रांस | 15 | माउंटेन स्पेशलिस्ट (पर्वतीय विशेषज्ञ) |
| जर्मनी | 13 | सैनिक |
| स्वीडन | 3 | अधिकारी |
| नीदरलैंड | 2 | सैनिक |
| नॉर्वे | 2 | सैनिक |
| ब्रिटेन | 1 | सैनिक |
3. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ग्रीनलैंड पहुंचे इन सैनिकों का मुख्य काम वहां की कठिन आर्कटिक परिस्थितियों का जायजा लेना है। ये टीमें भविष्य के बड़े सैन्य अभ्यासों की योजना बनाएंगी और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगी। डेनमार्क चाहता है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वहां के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की सुरक्षा करे और स्थानीय अधिकारियों को मदद पहुंचाए। इसके अलावा, इस मिशन का उद्देश्य भविष्य में सैनिकों की रोटेशन के जरिए वहां एक अधिक स्थायी उपस्थिति स्थापित करना भी है।
4. अमेरिका, चीन और रूस से निपटने की तैयारी
यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने स्पष्ट कहा है कि “ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अमेरिकी महत्वाकांक्षा अभी भी बरकरार है” और इसे रोकने के लिए प्रयास जारी हैं। वहीं, यह मिशन रूस और चीन से मिलने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए भी तैयार किया गया है। चीन और रूस दोनों ही आर्कटिक क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं, जिससे पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ गई है।
5. यूरोपीय एकजुटता और भविष्य की योजना
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस मिशन को किसी भी तरह के “कब्जे” के खतरे के खिलाफ एकता का प्रतीक बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा सैन्य बल प्रयोग की संभावना कम है और वह आर्थिक दबाव या निवेश के जरिए अपना प्रभाव बढ़ा सकता है, फिर भी यूरोपीय नेता कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। यह मिशन दुनिया को यह दिखाने की कोशिश है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए पूरा यूरोप एकजुट है।
Last Updated: 17 January 2026




