भारतीय रुपया विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार दबाव का सामना कर रहा है और अब यह यूएई दिरहम (UAE Dirham) के मुकाबले 25 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपये में आई यह गिरावट खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए रेमिटेंस (Remittance) के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकती है।
आरबीआई का स्पष्ट संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक रुपये के किसी खास स्तर को बचाने के लिए बाजार में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई डॉलर के मुकाबले 90 या 91 जैसे किसी विशिष्ट आंकड़े को लक्ष्य नहीं बनाता है। बैंक केवल तभी दखल देगा जब बाजार में बहुत अधिक अस्थिरता होगी। इसका मतलब है कि नीति निर्माता धीरे-धीरे रुपये को कमजोर होने देने के पक्ष में हैं।
मार्च 2026 तक 92 का स्तर छू सकता है डॉलर
बाजार के पूर्वानुमानों के मुताबिक, मार्च 2026 तक डॉलर के मुकाबले रुपया 92 के स्तर तक गिर सकता है। फिलहाल रुपया 90.8650 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो नवंबर के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। यह दिसंबर में बने 91.0750 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच रहा है। यदि वैश्विक व्यापार की स्थितियों में सुधार होता है, तो साल के अंत में कुछ रिकवरी देखी जा सकती है।
प्रवासियों के लिए घर पैसा भेजने का सही समय
रुपये की कमजोरी खाड़ी देशों (GCC) में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक वरदान की तरह है। जब रुपया कमजोर होता है, तो उन्हें अपनी विदेशी मुद्रा (जैसे दिरहम या डॉलर) के बदले ज्यादा भारतीय रुपये मिलते हैं। 25 रुपये प्रति दिरहम के करीब पहुंचना एनआरआई (NRI) के लिए अपनी कमाई भारत भेजने का एक शानदार अवसर है, जिससे उनकी बचत में इजाफा होगा।
रुपये में गिरावट के मुख्य कारण
इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। दुनिया भर में डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना और व्यापार घाटे का बढ़ना रुपये को कमजोर कर रहा है। इसके अलावा, आरबीआई का यह मानना कि भारत में महंगाई दर विकसित देशों से ज्यादा है, इसलिए सालाना 3 प्रतिशत की गिरावट एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
अर्थव्यवस्था की नींव अब भी मजबूत
करेंसी में गिरावट के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है। देश के पास लगभग 690 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है, जो किसी भी बड़े संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है। साथ ही, भारत की विकास दर ऊंची है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी नियंत्रण में है, जिससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
Last Updated: 19 January 2026




