G7 देशों ने ईरान युद्ध पर जताई चिंता, आम नागरिकों पर हमले तुरंत रोकने और समुद्री रास्ते खोलने की अपील की
दुनिया के ताकतवर देशों के समूह G7 ने ईरान में चल रहे युद्ध को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। फ्रांस में हुई बैठक के बाद G7 के विदेश मंत्रियों ने मांग की है कि आम नागरिकों और बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोका जाए। इस समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इन देशों ने युद्ध के कारण क्षेत्रीय शांति और समुद्री रास्तों पर पड़ रहे असर को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।
G7 देशों ने बैठक में क्या बड़े फैसले लिए और क्या मांग रखी है?
G7 देशों की इस साझा बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई है। इन देशों ने साफ तौर पर कहा है कि युद्ध की वजह से आम जनता को निशाना बनाना किसी भी हाल में सही नहीं है। बैठक के दौरान लिए गए मुख्य फैसलों और बयानों की जानकारी नीचे दी गई है:
- Strait of Hormuz: G7 देशों ने मांग की है कि Strait of Hormuz के रास्ते व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित और स्वतंत्र बनाया जाए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान न हो।
- फ्रांस का पक्ष: फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि अस्पतालों और रिहायशी इलाकों पर हमले करना कानूनन गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- ब्रिटेन की चेतावनी: ब्रिटेन ने ईरान पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है और समुद्री रास्ते बंद करने का विरोध किया है।
- जर्मनी की चिंता: जर्मनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यूक्रेन और ईरान के इन दो बड़े संकटों को एक साथ संभालना चुनौतीपूर्ण है।
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर क्या असर हो रहा है?
ईरान और US-इजरायल के बीच चल रहे इस युद्ध का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। खास तौर पर UAE, सऊदी अरब, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। ईरान द्वारा इन देशों की दिशा में दागे गए मिसाइलों और ड्रोनों के कारण तनाव काफी बढ़ गया है।
युद्ध की वजह से अब तक ईरान में 1900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 9,669 घर और व्यावसायिक इमारतें तबाह हो गई हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि Strait of Hormuz बंद होने से जरूरी सामानों की सप्लाई और हवाई उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस मामले में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि शांति बहाल की जा सके।




