GCC का बड़ा फैसला, ईरान के खिलाफ सैन्य हमले के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे खाड़ी देश
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के प्रमुख जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि खाड़ी देश ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि किसी भी हमले के लिए खाड़ी देशों के क्षेत्रों या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान क्षेत्र में शांति बनाए रखने और सीधे टकराव से बचने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
GCC प्रमुख के बयान की मुख्य बातें क्या हैं?
जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने 26 मार्च 2026 को आधिकारिक तौर पर खाड़ी देशों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सदस्य देश किसी भी सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहते हैं और अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हैं। परिषद ने स्पष्ट किया कि भले ही उन पर ईरान की ओर से हमले हुए हों, लेकिन वे बदले की कार्रवाई या किसी बड़े युद्ध का समर्थन नहीं करते हैं। GCC ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने के लिए मजबूर करें ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
ईरान के साथ बढ़ते विवाद और ताज़ा स्थिति
- हमलों की रिपोर्ट: 28 फरवरी के बाद से सभी छह GCC देशों पर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से हमले होने की जानकारी सामने आई है।
- UNHRC का प्रस्ताव: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान की सैन्य आक्रामकता के खिलाफ बहरीन और जॉर्डन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
- समुद्री मार्ग पर विवाद: ईरान पर आरोप लगाया गया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षित पारगमन के लिए शुल्क वसूल रहा है।
- इजरायल की कार्रवाई: रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना के प्रमुख अलीरेज़ा तंगसीरी को एक हमले में मार गिराया है।
- ग्लोबल सप्लाई पर असर: संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई रुक सकती है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा प्रभाव?
| क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| सुरक्षा | GCC देशों ने सुरक्षा के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल न होने देने का वादा किया है जिससे तनाव कम रहने की उम्मीद है। |
| आर्थिक स्थिति | तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। |
| भारतीय प्रवासी | युद्ध की स्थिति न बनने से खाड़ी में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है। |




