गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) पर्यटन की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। जल्द ही पर्यटकों को खाड़ी के छह देशों—संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन और कुवैत—की यात्रा के लिए अलग-अलग वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी। एक नए और एकीकृत (Unified) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यात्री सिर्फ एक आवेदन से इन सभी देशों में घूम सकेंगे। यह पहल यूरोप की प्रसिद्ध ‘शेजेन’ व्यवस्था से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य इस पूरे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और प्रशासनिक बाधाओं को खत्म करना है।
वीजा की कीमत और वैधता क्या होगी?
इस नई व्यवस्था के तहत, पर्यटकों को एक ‘शॉर्ट-स्टे वीजा’ (Short-stay visa) जारी किया जाएगा। मौजूदा योजना के अनुसार, इस वीजा की वैधता 30 दिनों की हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी फीस 90 से 130 डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 7,500 से 11,000 रुपये) के बीच रहने का अनुमान है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रियों को अब अलग-अलग देशों के लिए बार-बार वीजा फीस नहीं देनी होगी और वे आसानी से एक ही ट्रिप में कई देशों (Multi-destination) का प्लान बना सकेंगे।
लागू होने में देरी क्यों हो रही है?
इस यूनिफाइड वीजा को लागू करने की तारीख को लेकर कई बार चर्चा हुई है, लेकिन इसमें देरी का मुख्य कारण तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जटिलताएं हैं। छह अलग-अलग संप्रभु देशों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ जोड़ना एक बड़ी चुनौती है। इस सिस्टम के लिए सभी देशों को बायोमेट्रिक डेटाबेस, एंट्री-एग्जिट सिस्टम और ‘ब्लैकलिस्ट’ या वॉचलिस्ट को साझा करना होगा। जब तक यह तकनीकी ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं होता और सभी देशों के बीच डेटा शेयरिंग पर सहमति नहीं बनती, तब तक इसे पूरी तरह रोलआउट करना मुश्किल है।
क्या यह यूरोप के ‘शेजेन’ जैसा है?
अक्सर इस यूनिफाइड जीसीसी वीजा की तुलना यूरोप के शेजेन (Schengen) वीजा से की जाती है, लेकिन इसमें कुछ बुनियादी अंतर हैं जिन्हें समझना जरूरी है। यूरोप का शेजेन क्षेत्र 29 देशों को कवर करता है जहां आंतरिक बॉर्डर चेक लगभग खत्म हो चुके हैं और लोगों को वहां काम करने या बसने का अधिकार भी मिलता है। इसके विपरीत, GCC का यह मॉडल मुख्य रूप से पर्यटन और छोटी अवधि की यात्राओं के लिए है। इसमें देशों के बीच भौतिक बॉर्डर चेक (Physical border controls) बने रहेंगे और यह वीजा काम करने (Employment) या वहां बसने का अधिकार नहीं देगा।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
सुरक्षा के लिहाज से यह वीजा सिस्टम बहुत ही सख्त होगा। इस व्यवस्था के तहत डेटा साझा करने से किसी भी यात्री द्वारा नियम तोड़ने पर उसकी जानकारी सभी 6 देशों के पास तुरंत पहुंच जाएगी। नीचे दी गई तालिका में संभावित कार्रवाई को समझाया गया है:
| उल्लंघन का प्रकार (Violation) | संभावित परिणाम (Consequences) |
|---|---|
| ओवरस्टे (तय सीमा से ज्यादा रुकना) | दैनिक जुर्माना और भविष्य के लिए यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban)। |
| वीजा शर्तों का उल्लंघन | पूरे GCC क्षेत्र के डेटाबेस में ‘फ्लैग’ या ब्लैकलिस्ट होना। |
| एक देश में अपराध | अन्य 5 देशों में भी प्रवेश पर रोक, क्योंकि डेटा साझा होगा। |
UAE और पर्यटकों के लिए इसके फायदे
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए यह वीजा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुबई और अबू धाबी क्षेत्र के प्रमुख एविएशन हब हैं। संभावना है कि यूएई इस पूरे ब्लॉक के लिए मुख्य प्रवेश द्वार (Gateway) के रूप में कार्य करेगा, जहां पर्यटकों की बायोमेट्रिक और सुरक्षा जांच की जाएगी। पर्यटकों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि उन्हें अब हर देश की अलग-अलग और जटिल वीजा प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह कदम खाड़ी देशों की तेल पर निर्भरता कम कर पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
Last Updated: 17 January 2026





