अमेरिका और ईरान के बीच जारी धमकियों के दौर में, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कतर के अल उदीद एयर बेस पर एक नया एयर और मिसाइल डिफेंस कोऑर्डिनेशन सेल शुरू किया है। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में हवाई हमलों और मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सहयोगी देशों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। इस नई शुरुआत के साथ अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संकेत दिया है।
नया डिफेंस सेल और इसका उद्देश्य
इस नए ढांचे को ‘मिडिल ईस्टर्न एयर डिफेंस — कंबाइंड डिफेंस ऑपरेशंस सेल’ (MEAD-CDOC) नाम दिया गया है। यह सेल ‘कंबाइंड एयर ऑपरेशंस सेंटर’ (CAOC) का हिस्सा होगा, जो पिछले 20 वर्षों से मध्य पूर्व में सक्रिय है और जिसमें 17 देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “यह क्षेत्रीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सेल मध्य पूर्व में क्षेत्रीय बलों के बीच समन्वय को बेहतर करेगा और हवाई व मिसाइल रक्षा जिम्मेदारियों को साझा करने में मदद करेगा।” इस सेल का काम केवल मिसाइलें तैनात करना नहीं, बल्कि खतरों की जानकारी को तुरंत साझा करना और साझा प्रतिक्रिया तैयार करना है।
सैन्य अधिकारियों का क्या कहना है?
अमेरिकी वायु सेना के अधिकारी इस नई व्यवस्था को लेकर काफी सकारात्मक हैं। एयर फोर्स सेंट्रल कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डेरेक फ्रांस ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह नया सेल पूरे क्षेत्र में एकीकृत हवाई और मिसाइल सुरक्षा को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा, “MEAD-CDOC हमारे क्षेत्रीय भागीदारों के साथ विशेषज्ञता साझा करने और सामूहिक रूप से नए समाधान बनाने के लिए एक निरंतर मंच प्रदान करता है।” इसका मतलब यह है कि अब अमेरिका और खाड़ी देश अलग-अलग काम करने के बजाय एक टीम की तरह खतरों का सामना करेंगे, जिससे सुरक्षा घेरा और भी सख्त हो जाएगा।
बढ़ते खतरों और हमलों की पृष्ठभूमि
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हवाई हमलों का खतरा बढ़ा हुआ है। पिछले साल के अंत में कतर में कुछ स्थानों पर हमले देखे गए थे, जहां इजरायली बलों ने हमास के ठिकानों और ईरानी बलों ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाया था। इसके अलावा, ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसे निशाना बनाया गया, तो वह मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।
हालांकि, ब्रेकिंग डिफेंस से बात करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस सेल का गठन यह संकेत नहीं देता है कि अमेरिका तुरंत कोई सैन्य कार्रवाई करने जा रहा है। यह लंबे समय से चली आ रही योजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भविष्य के खतरों के लिए तैयार रहना है।
विशेषज्ञों की राय: यह कदम क्यों जरूरी था?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल हालिया हमलों की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीति है। आरएएनई (RANE) नेटवर्क के वरिष्ठ विश्लेषक रयान बोह्ल के अनुसार, यह सेल अमेरिका द्वारा दोहा (कतर) को दिए गए रक्षा प्रस्ताव को सुदृढ़ करने का एक प्रयास है।
वहीं, रबदान सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो क्रिस्टियन अलेक्जेंडर ने कहा कि यह सेल “प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित रक्षा से हटकर क्षेत्रीय एकीकरण” की ओर एक बदलाव है। इसका मतलब है कि अब ध्यान सिर्फ ज्यादा इंटरसेप्टर या सेंसर तैनात करने पर नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों के बीच रियल-टाइम में डेटा साझा करने और तालमेल बिठाने पर है। यह बदलाव इसलिए जरूरी है क्योंकि अब क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए “एड-हॉक” (कामचलाऊ) समन्वय काफी नहीं है।
प्रमुख विवरण और आंकड़े
इस नए मिशन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को नीचे दी गई तालिका में संक्षेप में समझा जा सकता है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| सेल का नाम | MEAD-CDOC (मिडिल ईस्टर्न एयर डिफेंस — कंबाइंड डिफेंस ऑपरेशंस सेल) |
| स्थान | अल उदीद एयर बेस, कतर |
| मूल संगठन | कंबाइंड एयर ऑपरेशंस सेंटर (CAOC) |
| भागीदार देश | अमेरिका और खाड़ी देश (CAOC में कुल 17 देश शामिल हैं) |
| मुख्य कार्य | मिसाइल और ड्रोन खतरों की जानकारी साझा करना और समन्वय बनाना |
Last Updated: 17 January 2026





