GCC महासचिव का कड़ा रुख, ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा- खाड़ी देशों की संप्रभुता से समझौता नहीं
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी (Jassim Mohammed Al-Budaiwi) ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों की सख्त निंदा की है। 29 मार्च 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के ये हमले खाड़ी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहे हैं। महासचिव ने बताया कि फरवरी के आखिर से शुरू हुए इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। इससे न केवल क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है, बल्कि दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है।
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इन हमलों से किन क्षेत्रों पर असर पड़ा?
ईरान की ओर से किए गए इन हमलों में नागरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया है। इससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान होने की खबरें हैं। महासचिव ने कहा कि ये हमले अब परोक्ष नहीं बल्कि सीधे सैन्य हमले के रूप में बदल गए हैं, जिससे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में है।
- सऊदी अरब और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।
- यूएई, बहरीन, ओमान और कतर में नागरिक सुविधाओं पर हमले हुए।
- होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से तेल की आवाजाही पर संकट आया।
- इन हमलों में कई आम नागरिक हताहत हुए और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
GCC देशों का अगला कदम क्या होगा?
GCC महासचिव ने साफ किया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में खाड़ी देशों की मांगों को शामिल करना जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की अपील की है। खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात भी कही है।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| अधिकारी का नाम | जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी (GCC महासचिव) |
| हमलों का समय | 28 फरवरी 2026 से लगातार जारी |
| सुरक्षा परिषद प्रस्ताव | प्रस्ताव संख्या 2817 (वर्ष 2026) |
| प्रभावित देश | सऊदी, यूएई, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन और जॉर्डन |
| रक्षा का अधिकार | संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 |
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और तेल सुविधाओं पर हमले का असर कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। चूंकि लाखों भारतीय इन देशों में रहते हैं, इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा उनके लिए भी एक बड़ा विषय है।




