Global Oil Price Update: कच्चे तेल के दाम में 6% का बड़ा उछाल, कीमत 97.60 डॉलर के पार
कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सऊदी न्यूज़ 50 की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 12 मार्च 2026 को कच्चे तेल के दाम 6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 97.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। इससे पहले पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर के करीब जाकर थोड़ी कम हुई थी लेकिन अब यह फिर से ऊपर की ओर जा रही है। इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ने लगा है जिससे आम आदमी और खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों की जेब पर भी महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।
अचानक क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
बाज़ार के विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव मुख्य कारण है। दुनिया भर में तेल की सप्लाई करने वाले मुख्य रास्ते अभी प्रभावित हैं।
- Strait of Hormuz बंद: ईरान के समुद्री तट के पास कमर्शियल जहाजों पर हमले और खतरों की रिपोर्ट के बाद इस महत्वपूर्ण रास्ते को लगभग बंद कर दिया गया है। दुनिया भर की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है।
- फैसिलिटी पर हमले का खतरा: सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की रास तनुरा फैसिलिटी के पास भी खतरों की खबर आई है जिससे बाज़ार में घबराहट बढ़ गई है।
- जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम: एक्सपर्ट्स के अनुसार कच्चे तेल की मौजूदा 97.60 डॉलर कीमत में करीब 18 डॉलर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव और डर की वजह से जुड़े हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने क्या कदम उठाए?
तेल संकट को कम करने के लिए दुनिया के बड़े देश और एजेंसियां कई अहम फैसले ले रही हैं लेकिन बाज़ार में इनका असर कम दिख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपना सबसे बड़ा फैसला लेते हुए 400 मिलियन बैरल इमरजेंसी तेल रिज़र्व जारी करने की मंजूरी दी है। इसमें अमेरिका से 172 मिलियन और जापान से 80 मिलियन बैरल तेल शामिल है। इसके अलावा G7 देश भी हालात को संभालने के लिए बातचीत कर रहे हैं। वहीं ओपेक (OPEC) ने अभी अपने 2026 और 2027 के अनुमानों में कोई बदलाव नहीं किया है और वे बाज़ार की स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। तेल सप्लाई में आई रुकावट इतनी बड़ी है कि बाज़ार ने इस इमरजेंसी रिज़र्व के कदम पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
आम जनता और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा मतलब है कि ट्रांसपोर्टेशन और ईंधन की लागत में बढ़ोतरी होगी। इस वजह से रोज़मर्रा के सभी सामान महंगे हो जाते हैं और महंगाई बढ़ती है।
- ग्लोबल बाज़ार में पेट्रोल और डीजल के रेट तेज़ी से बढ़ रहे हैं। अमेरिका में एक ही हफ्ते के अंदर डीजल 80 सेंट और गैसोलिन 50 सेंट महंगा होकर 3.48 डॉलर प्रति गैलन पर पहुंच गया है।
- अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रही तो दुनिया भर में महंगाई की दर काफी बढ़ जाएगी।
- गल्फ देशों में रहने वाले भारतीयों और अक्सर यात्रा करने वाले लोगों को आने वाले दिनों में महंगी फ्लाइट टिकट और बढ़े हुए खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।





