Iraq Embassy Update: गल्फ देशों का बड़ा फैसला, इराक से अपने सभी राजनयिकों को वापस बुलाया
गल्फ देशों (Gulf countries) के राजनयिकों ने इराक को पूरी तरह से छोड़ दिया है। 17 मार्च 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बगदाद से सभी खाड़ी देशों के मिशन और उनके अधिकारी पूरी तरह से वापस चले गए हैं। यह फैसला हाल ही में हुए ड्रोन और रॉकेट हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से लिया गया है। इस घटनाक्रम से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
राजनयिकों को वापस बुलाने का मुख्य कारण क्या है?
इराक में विदेशी दूतावासों और मिशन पर लगातार हमले हो रहे हैं जिसके कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 14 मार्च 2026 को एरबिल में UAE के वाणिज्य दूतावास (Consulate) पर ड्रोन से हमला किया गया था जिसमें दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा 13 और 14 मार्च को बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर भी ड्रोन और रॉकेट से कई बार हमले किए गए। इन हमलों के कारण संचार प्रणालियों को नुकसान पहुंचा और आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। सुरक्षा स्थिति को बिगड़ता देख ही खाड़ी देशों ने अपने अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकालने का कदम उठाया है।
इराक सरकार और अन्य देशों का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने 17 मार्च को एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने इन हमलों को आतंकवादी कृत्य बताया और कहा कि यह देश की शांति और स्थिरता को खराब करने की साजिश है।
- इराक सरकार ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे दूतावासों पर हमला करने वालों को जल्द से जल्द पकड़ें।
- इराकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
- अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने भी अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किया है और उन्हें तुरंत इराक छोड़ने को कहा है।
- अन्य अरब देशों ने भी इराक में अपने स्टाफ की संख्या को घटाकर काफी कम कर दिया है।
हमलों के पीछे कौन है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों की जिम्मेदारी ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक’ (Islamic Resistance in Iraq) नाम के गुट ने ली है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच विवाद के कारण यह पूरा क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक इस तनाव और ड्रोन हमलों के कारण आम नागरिकों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है। जब तक सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक विदेशी दूतावासों के पूरी तरह से खाली रहने की उम्मीद है।




