Gulf Oil Update: खाड़ी देशों ने 6.7 मिलियन बैरल तेल उत्पादन घटाया, 100 डॉलर के पार पहुँचा क्रूड ऑयल
खाड़ी देशों के प्रमुख तेल उत्पादकों ने अपने तेल उत्पादन में भारी कटौती कर दी है। सऊदी अरब, इराक, UAE और कुवैत ने मिलकर करीब 6.7 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) उत्पादन कम कर दिया है। यह कटौती 10 मार्च 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार की गई है। Strait of Hormuz में चल रहे तनाव और जहाजों की आवाजाही रुकने के कारण इन देशों को यह फैसला लेना पड़ा है। इस वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार चला गया है।
किस देश ने कितना उत्पादन घटाया?
Strait of Hormuz में पूरी तरह रुकावट के कारण तेल के टैंकर सुरक्षित बाहर नहीं जा पा रहे हैं। इस वजह से खाड़ी देशों के स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर चुके हैं और उन्हें मजबूरन उत्पादन रोकना पड़ा है। अलग-अलग देशों ने अपने उत्पादन में जो बड़ी कटौती की है, उसका विवरण नीचे दिया गया है:
| देश का नाम | कितना उत्पादन घटा (bpd) |
|---|---|
| इराक | 2.9 मिलियन |
| सऊदी अरब | 2.0 से 2.5 मिलियन |
| UAE | 5 लाख से 8 लाख |
| कुवैत | करीब 5 लाख |
स्टोरेज की समस्या को देखते हुए कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने 7 मार्च 2026 से क्रूड और रिफाइंड उत्पाद के एक्सपोर्ट पर ‘Force Majeure’ नियम लागू कर दिया है। कतर एनर्जी ने भी अपने ऑपरेशन्स पर रोक लगा दी है क्योंकि उनके फैसिलिटी पर खतरे की बात सामने आई है। ये सभी कदम सावधानी के तौर पर उठाए गए हैं ताकि स्टोरेज की सीमा को पार होने से रोका जा सके।
दुनिया भर में इसका क्या असर होगा
उत्पादन में यह कमी दुनिया भर के कुल तेल सप्लाई का करीब 6 प्रतिशत है। सऊदी अरामको के CEO अमीन नासर ने बताया है कि अगर Strait of Hormuz में यह रुकावट लंबे समय तक रही तो ग्लोबल इकॉनमी पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। इससे आम आदमी की जिंदगी पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि एविएशन, खेती और ऑटोमोबाइल सेक्टर में महँगाई काफी बढ़ जाएगी। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने साफ कहा है कि अगर यही स्थिति रही तो अगले कुछ हफ्तों में तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है।
इस संकट से निपटने के लिए सऊदी अरब और UAE जैसे देश अब Strait of Hormuz को बायपास करने का रास्ता अपना रहे हैं। सऊदी अरामको अपने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए क्रूड को रेड सी के पोर्ट तक भेज रहा है। वहीं, UAE भी फुजैरा पाइपलाइन का उपयोग कर रहा है। अमेरिका भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तेल की कमी को पूरा करने के लिए रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है ताकि मार्केट में सप्लाई को संतुलित किया जा सके।




