गल्फ से तेल और गैस की सप्लाई बहाल होने में लगेंगे 6 महीने, IEA ने दी बड़ी चेतावनी
International Energy Agency (IEA) के प्रमुख Fatih Birol ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि गल्फ क्षेत्र से तेल और गैस की सप्लाई को फिर से सामान्य करने में कम से कम 6 महीने का समय लग सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट पर इसका भारी असर पड़ रहा है। Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया इस समय इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रही है।
तेल और गैस की सप्लाई में इतनी देरी क्यों हो रही है?
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण Strait of Hormuz से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात अब अपने सामान्य स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है। Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है, जहाँ से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल गुजरता है। इस रास्ते में रुकावट आने से पूरी दुनिया के देशों में तेल की कमी का बड़ा खतरा पैदा हो गया है और मार्केट इस समस्या की गंभीरता को कम आंक रहा है।
मार्केट को संभालने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
IEA के सदस्य देशों ने इस संकट से निपटने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं और वे लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं:
- IEA के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल अपने इमरजेंसी स्टॉक से बाजार में उतारने का फैसला लिया है।
- Fatih Birol के अनुसार, यह तेल बाजार के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई है।
- IEA स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी स्टॉक से और तेल जारी किया जा सकता है।
- G7 देशों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ भी सप्लाई सुरक्षा को लेकर विशेष बैठक की गई है।
आम आदमी और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले तेल निर्यात पर निर्भर देशों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। सप्लाई में 6 महीने की देरी का सीधा मतलब है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे न केवल यात्रा और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, बल्कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। IEA ने स्पष्ट किया है कि जब तक Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है।





