Hormuz Strait Update: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच नया समुद्री रास्ता आया सामने, भारतीय जहाजों समेत कई बड़े पोत सुरक्षित बाहर निकले.
होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे भारी तनाव के बीच कमर्शियल जहाजों के लिए राहत की खबर आई है। अब जहाजों ने ओमान की समुद्री सीमा के भीतर से एक नया और सुरक्षित रास्ता ढूंढ लिया है जिससे सुरक्षा का जोखिम काफी कम हो गया है। इस मार्ग के इस्तेमाल से न केवल सुरक्षा का खतरा कम हुआ है, बल्कि ईरान द्वारा लगाए जाने वाले भारी शुल्क से भी जहाजों को बचाव मिल रहा है। भारतीय जहाजों के साथ-साथ कई तेल और गैस टैंकर इस नए रास्ते का उपयोग करते देखे गए हैं।
कौन से जहाजों ने किया नए रास्ते का इस्तेमाल और क्या है इसकी खासियत?
यह नया मार्ग पारंपरिक रास्तों से अलग है और ओमान की समुद्री सीमा के अंदर रहता है। इससे अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में होने वाले खतरों से बचा जा सकता है। डेटा के अनुसार अब तक कम से कम चार बड़े जहाज इस रास्ते का फायदा उठा चुके हैं। इसमें शामिल जहाजों की जानकारी इस प्रकार है:
- Habrut और Dhalkut: मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले ये दो कच्चे तेल टैंकर इसी रास्ते से निकले।
- Sohar: पनामा के झंडे वाला यह एलएनजी कैरियर भी नए मार्ग से गुजरा।
- MSV Cuba MNV 2183: यह भारतीय झंडे वाला कार्गो जहाज 31 मार्च 2026 को दुबई से रवाना होकर इसी मार्ग पर देखा गया।
- Green Sanvi: यह एलपीजी टैंकर 4 अप्रैल 2026 को सुरक्षित बाहर निकला।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा और नए नियमों पर बड़ा अपडेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक 4 अप्रैल 2026 तक कुल आठ भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। तनाव को देखते हुए कुछ जहाजों ने ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के पास अपने लोकेशन सिग्नल भी बंद कर दिए थे ताकि वे सुरक्षित रह सकें। ईरान अब इस क्षेत्र में नए नियम और प्रोटोकॉल लागू करने की तैयारी कर रहा है जिसके तहत जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया वैकल्पिक मार्ग उन जहाजों के लिए बहुत जरूरी हो गया है जो ईरान द्वारा लगाए जाने वाले संभावित 2 मिलियन डॉलर तक के भारी शुल्क से बचना चाहते हैं। ईरान और ओमान के बीच समुद्री यातायात की निगरानी के लिए एक संयुक्त मसौदे पर भी बात चल रही है। फिलहाल ओमान के इस रास्ते ने खाड़ी क्षेत्र में व्यापार करने वाले जहाजों को एक सुरक्षित विकल्प दे दिया है जिससे भारतीय कंपनियों ने भी राहत की सांस ली है।




