Global Oil Crisis: IEA ने खोला तेल का खजाना, 40 करोड़ बैरल की सप्लाई से कीमतों पर पड़ेगा असर
ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने एलान किया है कि वो अपने इमरजेंसी रिजर्व से भारी मात्रा में तेल निकालेगी ताकि बाज़ार में तेल की कमी न हो। IEA के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने चेतावनी दी है कि यह संकट काफी गंभीर है और अगर इसे सही समय पर नहीं संभाला गया, तो यह पिछले सभी तेल संकटों के रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
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IEA ने अब तक क्या बड़े कदम उठाए हैं?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल निकालने पर सहमति जताई है। यह एजेंसी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। पेरिस में हुई एक इमरजेंसी मीटिंग के बाद यह तय किया गया कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को देखते हुए दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
- IEA सदस्य: 32 देशों ने सर्वसम्मति से तेल रिलीज करने का फैसला लिया।
- कुल मात्रा: 400 मिलियन (40 करोड़) बैरल तेल बाज़ार में उतारा गया।
- मौजूदा स्टॉक: इस रिलीज के बाद भी सदस्य देशों के पास 1.4 अरब बैरल का सुरक्षित भंडार बचा है।
- भविष्य की योजना: जरूरत पड़ने पर और ज्यादा तेल निकालने के संकेत दिए गए हैं।
Strait of Hormuz और सप्लाई पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
Fatih Birol के अनुसार Strait of Hormuz का रास्ता फिर से खुलना बेहद जरूरी है क्योंकि यहाँ से तेल और गैस की सबसे ज्यादा आवाजाही होती है। 40 करोड़ बैरल का यह स्टॉक फिलहाल Strait of Hormuz बंद होने से होने वाली 20 दिनों की तेल की कमी को पूरा कर सकता है। बाज़ार में तेल की सप्लाई कम होने से इसकी कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।
| देश/क्षेत्र | तेल की मात्रा (बैरल) | स्थिति |
|---|---|---|
| IEA सदस्य देश | 400 मिलियन | रिलीज की अनुमति दी गई |
| जापान | 15 दिन की खपत के बराबर | प्राइवेट सेक्टर से रिलीज शुरू |
| एशिया-ओशिनिया क्षेत्र | 108.6 मिलियन | तुरंत रिलीज का एलान |
जापान ने अपने प्राइवेट सेक्टर के रिजर्व से तेल निकालना शुरू कर दिया है और मार्च के अंत तक सरकारी स्टॉक से भी सप्लाई बढ़ाने की योजना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से उन प्रवासियों और व्यापार करने वालों को थोड़ी राहत मिल सकती है जो बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों से डरे हुए हैं। एजेंसी अभी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकें।




