Middle East Airline Crisis: फ्लाइट्स कैंसिल होने से आसमान पर पहुंचा किराया, यात्रियों की बढ़ी मुसीबत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल एयरलाइन इंडस्ट्री इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष की वजह से हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है और ईंधन की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। कुवैत सहित कई खाड़ी देशों में उड़ानों के कैंसिल होने और रूट बदलने की वजह से आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टिकट की कीमतों में भारी उछाल और नई गाइडलाइन
कुवैती फेडरेशन ऑफ ट्रैवल एंड टूरिज्म ऑफिस के प्रमुख मोहम्मद अल-मुतैरी ने बताया कि कुछ रूटों पर उड़ानों की कमी और मांग बढ़ने से टिकट के दाम बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार मध्य पूर्व में हवाई टिकट की कीमतों में 11 प्रतिशत से लेकर 135 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ असाधारण मामलों में यह वृद्धि 400 प्रतिशत के करीब भी पहुंच गई है। एयरलाइंस ने तेल की कीमतों में इजाफे के कारण फ्यूल सरचार्ज भी जोड़ना शुरू कर दिया है।
विभिन्न एयरलाइंस की उड़ानों पर ताजा अपडेट
क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी सेवाएं निलंबित कर दी हैं या उनमें बदलाव किया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा से कम से कम 48 घंटे पहले फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। प्रभावित एयरलाइंस की स्थिति नीचे टेबल में दी गई है।
| एयरलाइन का नाम | अपडेट की जानकारी | असर |
|---|---|---|
| Oman Air | मस्कट, दुबई, कुवैत और बहरीन की उड़ानें रद्द | 31 मार्च तक प्रभावी |
| Jazeera Airways | दुबई के लिए अल-कसुमा के रास्ते उड़ानें शुरू | 31 मार्च से प्रभावी |
| Qatar Airways | सीमित सेवाएं और फ्लेक्सिबल बुकिंग विकल्प | 28 मार्च तक असर |
| Virgin Atlantic | दुबई और रियाद की सेवाएं सस्पेंड | 28 मार्च तक बंद |
| Air Canada | दुबई और तेल अवीव के लिए नई बुकिंग पॉलिसी | रिफंड और रीबुकिंग विकल्प |
एयरस्पेस बंद होने से बढ़ा संकट
ईरान, इजरायल, इराक, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में समय-समय पर एयरस्पेस पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद किए गए हैं। इसके कारण विमानों को लंबे रूट से जाना पड़ रहा है जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और यात्रा का समय भी बढ़ गया है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यात्रा और भी महंगी हो सकती है। कई देशों के दूतावासों ने अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेश दिए हैं।




