IMF Warning: मिडिल ईस्ट युद्ध से दुनिया की अर्थव्यवस्था को लगेगा बड़ा झटका, तेल और गैस की किल्लत से बढ़ेगी महंगाई
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। International Monetary Fund (IMF) की चीफ Kristalina Georgieva ने चेतावनी दी है कि इस जंग का असर साल 2026 तक रहेगा। तेल और गैस की सप्लाई रुकने से न सिर्फ महंगाई बढ़ेगी, बल्कि ग्लोबल ग्रोथ भी धीमी हो जाएगी। यह संकट दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक झटका साबित हुआ है।
तेल और गैस की सप्लाई पर क्या असर पड़ा है?
युद्ध की वजह से दुनिया के बाजारों में पहुँचने वाले तेल की सप्लाई करीब 13% और गैस की सप्लाई 20% कम हो गई है। कुल 72 एनर्जी फैसिलिटी को नुकसान पहुँचा है, जिनमें से एक तिहाई पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इनमें कतर का Ras Laffan कॉम्प्लेक्स भी शामिल है। इन सुविधाओं को फिर से चालू करने और पूरी क्षमता से उत्पादन करने में 3 से 5 साल का समय लग सकता है।
| विवरण | असर/डेटा |
|---|---|
| तेल सप्लाई में कमी | 13% |
| गैस सप्लाई में कमी | 20% |
| क्षतिग्रस्त एनर्जी फैसिलिटी | 72 (एक तिहाई गंभीर रूप से तबाह) |
| रिकवरी में लगने वाला समय | 3 से 5 साल |
| अनुमानित IMF इमरजेंसी मदद | 20 अरब से 50 अरब डॉलर |
भारत और प्रवासियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस आर्थिक झटके का असर पूरी दुनिया पर अलग-अलग तरीके से पड़ेगा। भारत में बिजली कटौती की समस्या आ सकती है और विदेशों से आने वाले पैसों (remittances) पर भी जोखिम बना हुआ है, जिससे यहाँ के आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है। दक्षिण कोरिया में एनर्जी राशनिंग और ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की भारी कमी देखी गई है, जबकि फिलीपींस ने एनर्जी सेक्टर में इमरजेंसी घोषित कर दी है।
IMF ने सरकारों को क्या सलाह दी है?
IMF ने देशों को चेतावनी दी है कि वे एक्सपोर्ट या कीमतों पर कंट्रोल लगाने जैसे एकतरफा कदम न उठाएं, क्योंकि इससे वैश्विक अस्थिरता और बढ़ सकती है। सरकारों को केवल गरीब और कमजोर परिवारों को अस्थायी मदद देने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, सेंट्रल बैंकों को कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की सलाह दी गई है। IMF 14 अप्रैल 2026 को अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी करेगा, जिसमें आर्थिक स्थिति के अलग-अलग पहलुओं को बताया जाएगा।




