अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने मिडिल ईस्ट में जारी मौजूदा तनाव और युद्ध को लेकर बड़ी चिंता जताई है। आईएमएफ का कहना है कि इस जंग की वजह से क्षेत्र के देशों में गंभीर आर्थिक अस्थिरता पैदा हुई है और व्यापारिक गतिविधियों में रुकावट आ रही है। ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। आईएमएफ इस पूरी स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है क्योंकि यह तनाव लगातार बढ़ रहा है।

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आईएमएफ अधिकारियों ने किन खतरों के बारे में बताया है?

आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर Kristalina Georgieva ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो इससे दुनिया भर की आर्थिक स्थिरता को बड़ा खतरा हो सकता है। यह स्थिति सीधे तौर पर तेल और गैस की कीमतों, महंगाई और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित करेगी। फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर Dan Katz ने 3 मार्च 2026 को कहा था कि आर्थिक नुकसान की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह जंग कितनी लंबी खिंचती है और इससे क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं, विशेष रूप से ऊर्जा उद्योग को कितना नुकसान होता है।

इस युद्ध का व्यापार और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा है?

आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति व्यापार के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां के व्यापारिक माहौल पर भी इसका असर दिख रहा है। मोरक्को और लिकटेंस्टीन जैसे देशों की हालिया आर्थिक रिपोर्टों में भी इस जंग को अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम माना गया है।

प्रभाव का क्षेत्र मुख्य चिंता
व्यापार सप्लाई चेन में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों में कमी
एनर्जी सेक्टर तेल और गैस की कीमतों में अचानक उछाल की संभावना
शेयर बाजार वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव
महंगाई जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का डर