भारत ने सालों बाद ईरान से खरीदा रसोई गैस का पहला कार्गो, अमेरिका की पाबंदी हटने के बाद हुआ फैसला
भारत ने कई सालों के अंतराल के बाद ईरान से रसोई गैस (LPG) की पहली खेप खरीदी है। यह खरीदारी अमेरिका द्वारा ईरान के तेल और ईंधन पर लगे प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट के बाद संभव हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Aurora नाम का एक टैंकर ईरानी गैस लेकर भारत के मंगलौर पोर्ट पर पहुंचने वाला है। इस गैस का इस्तेमाल Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी कंपनियां करेंगी।
अमेरिकी छूट और भुगतान की प्रक्रिया क्या है?
अमेरिकी सरकार ने 20 मार्च 2026 से एक महीने के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है ताकि बाजार में ईंधन की कमी न हो और कीमतें स्थिर रहें। भारत इस खरीदारी के बदले ईरान को रुपये में भुगतान करने की तैयारी में है। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि भारत भविष्य में ईरान से और भी गैस खरीदने पर विचार कर सकता है। फिलहाल भारत के अपने जहाज जैसे Pine Gas और Jag Vasant भी लगभग 90 हजार टन गैस लेकर भारत पहुंचने वाले हैं।
भारत में घरेलू गैस सप्लाई के लिए सरकार के नए आदेश
देश में गैस की किल्लत को देखते हुए भारत सरकार ने कुछ कड़े फैसले लिए हैं ताकि सप्लाई बनी रहे। इन नियमों का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा:
- जिन इलाकों में पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा है, वहां ग्राहकों को जल्द ही गैस सिलेंडर छोड़कर पीएनजी अपनानी होगी।
- अगर उपभोक्ता पीएनजी पर शिफ्ट नहीं होते हैं, तो उनकी रसोई गैस की सप्लाई रोकी जा सकती है।
- होटल और रेस्टोरेंट अब ग्राहकों से खाने के बिल में अलग से ‘एलपीजी चार्ज’ या ईंधन वसूली का पैसा नहीं ले सकेंगे।
- रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन का नियम लागू रहेगा।
- सरकार का मुख्य उद्देश्य गैस पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार तेजी से करना है।
शिपिंग और मंत्रालय का क्या है रुख?
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ईरानी ईंधन खरीदने का फैसला पूरी तरह से तेल कंपनियों का व्यावसायिक निर्णय है। 25 मार्च 2026 को शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि कई भारतीय एलपीजी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं और अगले 2-3 दिनों में भारत पहुंच जाएंगे। इससे भारत में चल रही रसोई गैस की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट 19 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी, जिससे वैश्विक बाजार में करीब 14 करोड़ बैरल तेल आने की उम्मीद है।




