भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए कन्फर्म किया है कि भारत फिर से ईरान से कच्चे तेल की खरीदारी कर रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच भारत ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिछले महीने अमेरिका की तरफ से मिली पाबंदियों में ढील के बाद यह कदम उठाया गया है। यह फैसला भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले सात सालों में यह पहली बार है जब भारत आधिकारिक तौर पर ईरान से तेल मंगा रहा है।

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भारत में तेल की सप्लाई और पेमेंट को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

भारत सरकार के मंत्रालय ने उन सभी रिपोर्टों को गलत बताया है जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान से तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आ रही है। मंत्रालय के अनुसार भारत का तेल भंडार आने वाले महीनों के लिए सुरक्षित है और पेमेंट को लेकर भी कोई समस्या नहीं है।

  • 4 अप्रैल 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईरान से तेल खरीदने की आधिकारिक पुष्टि की।
  • भारत दुनिया के 40 से अधिक देशों से तेल खरीद रहा है, जिससे सप्लाई का नेटवर्क काफी मजबूत है।
  • मंगलुरु बंदरगाह पर 2 अप्रैल 2026 को ईरान से आया LPG जहाज सुरक्षित तरीके से पहुंच चुका है।
  • सरकार ने उन दावों को खारिज किया है कि ईरान का तेल चीन की तरफ भेजा जा रहा है।

अमेरिकी छूट और तेल आयात की मुख्य बातें क्या हैं?

अमेरिका ने पिछले महीने ही ईरानी तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में अस्थायी छूट दी थी। यह छूट 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी, जिससे भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को तेल मंगाने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, बाजार में कुछ चुनौतियां भी देखी जा रही हैं। कुछ व्यापारियों का कहना है कि ईरान से तेल मंगाने में कागजी और पाबंदियों से जुड़ी जटिलताएं अभी भी बनी हुई हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ डीलर पेमेंट के लिए चीनी युआन की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने फिलहाल सप्लाई चैन को स्थिर बताया है। मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद भारत अपनी जरूरतों के लिए हर संभव विकल्प पर काम कर रहा है।