भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत, विपक्ष ने संसद के बाहर किया जोरदार प्रदर्शन
भारत में रसोई गैस की किल्लत को लेकर विपक्षी दलों ने संसद भवन के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की वजह से देश में गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। 25 मार्च 2026 को अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, संसद की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस, DMK और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। देश के कई हिस्सों में घरेलू गैस की कमी की वजह से आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने गैस संकट को संभालने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भारत सरकार ने गैस संकट से निपटने और आपूर्ति को सामान्य बनाने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं। तेल मंत्रालय ने गैस पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के लिए नए नियम लागू किए हैं।
- Essential Commodities Act: सरकार ने इस कानून को लागू कर दिया है ताकि गैस पाइपलाइन के काम को जल्द से जल्द मंजूरी मिल सके।
- 24 घंटे में मंजूरी: पाइपलाइन बिछाने के आवेदनों को अब राज्यों द्वारा 24 घंटे के भीतर अनुमति देने का निर्देश दिया गया है।
- LPG उत्पादन में तेजी: सभी तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे घरेलू रसोई गैस का उत्पादन अपनी पूरी क्षमता के साथ बढ़ाएं।
- PNG पर जोर: सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइप वाली गैस (PNG) का इस्तेमाल शुरू करें ताकि सप्लाई पर दबाव कम हो।
ईरान युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार की ताज़ा स्थिति क्या है?
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से ही दुनिया भर में ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से खाड़ी देशों से आने वाले गैस जहाजों का रास्ता रुक गया है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर सीधा पड़ा है।
| विवरण | ताज़ा जानकारी |
|---|---|
| कच्चे तेल की कीमत | 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची |
| युद्ध की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 को हवाई हमलों से |
| कीमतों में बदलाव | तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा का उछाल |
| भारत की रणनीति | विभिन्न देशों से गैस और तेल की खरीद |
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बयान दिया है कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है और आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।




