Gulf में बढ़ रहा तनाव, भारत और कतर के बीच हुई बड़ी चर्चा, जयशंकर ने शांति और सुरक्षा पर दिया जोर.
खाड़ी देशों में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल-थानी के बीच अहम बातचीत हुई है. 6 अप्रैल 2026 को हुई इस फोन कॉल में दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति पर पड़ने वाले गंभीर असर पर चिंता जताई. भारत ने साफ़ किया कि किसी भी विवाद का हल बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से ही निकलना चाहिए.
कतर ने किन खतरों पर जताई चिंता?
कतर के प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि पानी, भोजन और ऊर्जा जैसी जरूरी सुविधाओं को निशाना बनाना गलत है और इससे आम जनता को परेशानी हो सकती है. कतर के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि दोनों नेताओं ने समुद्री जहाजों की आवाजाही की आजादी बनाए रखने पर भी सहमति जताई. खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका है.
भारतीय प्रवासियों और ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं. जयशंकर ने इस स्थिति को संभालने के लिए कतर के अलावा यूएई और ईरान के नेताओं से भी संपर्क साधा है. इस बातचीत से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- तारीख: यह मुख्य बातचीत 6 अप्रैल 2026 को हुई, जबकि कुछ चर्चाएं 5 अप्रैल को भी की गईं.
- प्रमुख मुद्दे: सैन्य तनाव कम करना और समुद्री व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित रखना.
- भारत का रुख: भारत लगातार विवादों को कम करने और कूटनीति के इस्तेमाल की सलाह दे रहा है.
- क्षेत्रीय सुरक्षा: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अन्य खाड़ी देशों पर न पड़े, इस पर ध्यान दिया जा रहा है.
जयशंकर ने यूएई के उप प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से भी बात की ताकि वेस्ट एशिया के हालात पर तालमेल बनाया जा सके. भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे ताकि वहां रहने वाले भारतीयों और व्यापार पर कोई आंच न आए.




