रूस अब भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को सिर्फ तेल और ऊर्जा तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि वह इसे एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। रूसी सरकार और वहां की कंपनियां भारत में ‘ज्वाइंट वेंचर’ (संयुक्त उद्यम) स्थापित करने को लेकर बेहद गंभीर हैं। रूस के व्यापार प्रतिनिधि आंद्रे सोबोलेव ने साफ शब्दों में कहा है कि मॉस्को के विदेशी आर्थिक एजेंडे में भारत ‘पूरी तरह से प्राथमिकता’ पर है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में ही उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग करना और आपसी व्यापार को बढ़ाना है।
किन क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे दोनों देश?
रूसी कंपनियां भारत में स्थानीय उत्पादन शुरू करने के लिए कई अहम सेक्टर्स में बातचीत कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, जहाज निर्माण (Shipbuilding), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), रिन्यूएबल एनर्जी, तेल प्रसंस्करण और धातुकर्म (Metallurgy) जैसे क्षेत्रों में ज्वाइंट वेंचर शुरू करने की योजना है। आंद्रे सोबोलेव का कहना है कि रूसी कंपनियां भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं देख रही हैं, बल्कि वे यहाँ प्रोडक्शन यूनिट्स लगाकर दक्षिण एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सामान सप्लाई करना चाहती हैं। दूसरी ओर, भारतीय कंपनियां भी रूस में व्यापार के नए मौके तलाश रही हैं।
नॉर्दन सी रूट: व्यापार का नया रास्ता
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक और बड़ा क्षेत्र ‘नॉर्दन सी रूट’ (Northern Sea Route) है। सोबोलेव ने बताया कि यह रूट लॉजिस्टिक्स और शिपिंग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह समुद्री रास्ता रूस के आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और यूरोपीय रूस को सुदूर पूर्व (Far East) से जोड़ता है। लगभग 5,600 किलोमीटर लंबा यह मार्ग बेंट्स और कारा सागर से होते हुए बेरिंग सागर तक जाता है। भारत और रूस ने इस रूट पर एक स्थिर कार्गो बेस तैयार करने और परिवहन के लिए आर्थिक मानक तय करने पर सहमति जताई है।
100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
व्यापारिक आंकड़ों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए भी बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार, दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना है। भारत की कोशिश है कि वह रूस को अपने वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात दोगुना करके 10 अरब डॉलर तक पहुंचाए। अजय सहाय ने कहा कि 100 अरब डॉलर के लक्ष्य में भारत की हिस्सेदारी 30-35 अरब डॉलर होनी चाहिए, जबकि रूस से आयात लगभग 60-65 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है।
एक नजर: प्रमुख सेक्टर और भावी योजनाएं
रूस और भारत के बीच चल रही इन नई व्यापारिक चर्चाओं के मुख्य बिंदुओं को नीचे दी गई तालिका में आसानी से समझा जा सकता है:
| विषय (Topic) | विवरण (Details) |
|---|---|
| फोकस सेक्टर | इंजीनियरिंग, जहाज निर्माण, आईटी, रिन्यूएबल पावर, तेल प्रसंस्करण, धातुकर्म। |
| मुख्य उद्देश्य | उत्पादों का स्थानीयकरण (Localization) और दक्षिण एशिया में सप्लाई। |
| नया लॉजिस्टिक्स रूट | नॉर्दन सी रूट (आर्कटिक क्षेत्र में 5,600 किमी)। |
| 2030 का लक्ष्य | कुल व्यापार 100 अरब डॉलर (भारत का निर्यात लक्ष्य $30-35 अरब)। |
वैश्विक मंच पर मजबूत होती साझेदारी
दिसंबर में हुए वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के बाद से आर्थिक सहयोग पर जोर बढ़ा है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) जैसे मंच भी इस साझेदारी को समर्थन दे रहे हैं, जहाँ एआई (AI), फार्मास्यूटिकल्स और लॉजिस्टिक्स में नए सौदों पर बात हो रही है। उदाहरण के लिए, भारतीय फर्म API-M रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र में एक हाई-टेक प्लांट लगाने की परियोजना में शामिल है। ये प्रयास बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, दोनों देश ऊर्जा से हटकर तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग में भी एक-दूसरे का साथ देने को तैयार हैं।
Last Updated: 16 January 2026





