भारतीय रुपये में बुधवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी 31 पैसे टूटकर 91.99 के स्तर पर बंद हुई। यह आंकड़ा अब तक का सबसे निचला स्तर है और पिछले एक सप्ताह में दूसरी बार रुपया इस लेवल पर पहुंचा है। इससे पहले 23 जनवरी को भी करेंसी इसी स्तर पर थी।
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क्यों आई रुपये में इतनी बड़ी गिरावट?
बुधवार को बाजार की शुरुआत काफी अच्छी हुई थी। भारत और यूरोप के बीच हुए व्यापार समझौते की खबर से रुपया मजबूती के साथ 91.60 पर खुला था। लेकिन दिन के अंत तक तेल आयातकों और कंपनियों द्वारा डॉलर की भारी मांग के कारण सारी बढ़त खत्म हो गई। विदेशी निवेशकों द्वारा बाजार से पैसा निकालने और वैश्विक तनाव के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे रुपये पर दबाव बना और वह नीचे आ गया।
डॉलर के मुकाबले रुपये का हाल
बाजार के जानकारों के मुताबिक महीने का अंत होने के कारण भी डॉलर की डिमांड ज्यादा थी। यहां देखिए 28 जनवरी 2026 के कारोबार के मुख्य आंकड़े:
| तारीख | 28 जनवरी 2026 |
| क्लोजिंग रेट | 91.99 प्रति डॉलर |
| गिरावट | 31 पैसे |
| इंट्राडे हाई | 91.50 रुपये |
| पिछला रिकॉर्ड | 23 जनवरी (समान स्तर) |
व्यापार समझौते का भी नहीं दिखा असर
मंगलवार को ही भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पूरा हुआ था। इसे एक बड़ी डील माना जा रहा है जिससे कपड़ों, रसायन और जूतों जैसे भारतीय सामानों को यूरोप में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। इस अच्छी खबर के बावजूद वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर धकेल दिया। रिजर्व बैंक ने भी इसे संभालने की कोशिश की मगर गिरावट नहीं रुकी।




