ईरान ने Strait of Hormuz में किया 3 कमर्शियल जहाजों पर हमला, Thai cargo ship में लगी आग और 3 क्रू मेंबर लापता
बुधवार 11 मार्च 2026 को Strait of Hormuz के पास तीन कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा हमले की खबर सामने आई है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट और UKMTO के ताज़ा जानकारी के अनुसार इन व्यापारिक जहाजों पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया. इनमें से एक थाईलैंड का बल्क कैरियर Mayuree Naree है जिसके इंजन रूम में आग लग गई और तीन क्रू मेंबर अब भी लापता बताए जा रहे हैं. इस बड़ी घटना के बाद से इस रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
क्या है हमले की पूरी जानकारी?
UKMTO के रिपोर्ट के अनुसार यह घटनाएं अलग अलग समय और जगह पर हुईं.
- पहला हमला 01:58 GMT पर UAE के Ras al-Khaimah से 25 मील दूर एक कंटेनर जहाज पर किया गया.
- दूसरा हमला 02:05 GMT पर दुबई से 50 मील दूर एक बल्क कैरियर पर हुआ.
- तीसरा हमला 04:35 GMT पर ओमान के उत्तर में 11 नॉटिकल मील दूर एक कार्गो जहाज पर हुआ.
ईरान के IRGC Navy ने बयान जारी कर Mayuree Naree और लाइबेरिया के जहाज Express Rome पर हमले की जिम्मेदारी ली है. उनका कहना है कि इन जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और इस समुद्री क्षेत्र का गलत तरीके से इस्तेमाल किया.
क्रू मेंबर्स को लेकर क्या है ताजा अपडेट?
हमले का शिकार हुआ Mayuree Naree जहाज UAE के Khalifa Port से भारत के Kandla Port की तरफ जा रहा था.
इस जहाज के पिछले हिस्से पर दो प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ जिससे इसके इंजन रूम में भयानक आग लग गई.
Royal Thai Navy के अनुसार जहाज पर कुल 23 क्रू मेंबर सवार थे जिनमें से 20 लोगों को ओमान की नेवी ने सुरक्षित निकालकर Khasab पहुंचा दिया है.
बाकी तीन क्रू मेंबर अभी भी लापता हैं और ऐसा माना जा रहा है कि वे इंजन रूम में ही फंसे रह गए.
UKMTO ने जारी की नई एडवाइजरी
इस घटना के बाद UKMTO ने इस रूट से गुजरने वाले सभी जहाजों को पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ने को कहा है.
आंकड़ों के अनुसार 28 फरवरी 2026 से लेकर अब तक इस समुद्री इलाके में 17 घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिनमें 13 सीधे हमले शामिल हैं.
यह रास्ता कमर्शियल जहाजों के लिए काफी अहम है और भारत से UAE या अन्य खाड़ी देशों के बीच व्यापार के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल भारी मात्रा में होता है.
लगातार हो रहे ऐसे हमलों से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर असर पड़ रहा है और खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों के लिए यह चिंता का विषय है.




