ईरान में दो और लोगों को दी गई फांसी, मिलिट्री कैंप पर हमले का था आरोप, अब तक कई लोगों को दी जा चुकी सजा
ईरान की सरकार ने रविवार, 5 अप्रैल 2026 को दो और लोगों को फांसी दे दी है। इन दोनों व्यक्तियों पर इसी साल जनवरी में एक सैन्य ठिकाने पर हमला करने और वहां से हथियार चुराने की कोशिश करने का गंभीर आरोप था। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी मिज़ान ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इनकी मौत की सजा को सही ठहराया था। यह मामला ईरान में चल रहे हालिया विरोध प्रदर्शनों और उन पर हो रही सरकारी कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
किन लोगों को दी गई फांसी और क्या था पूरा मामला?
ईरान के न्यायिक विभाग ने मोहम्मदमीन बिग्लारी (Mohammadamin Biglari) और शाहीन वाहिदपरस्त (Shahin Vahedparast) को फांसी दी है। इन दोनों पर आरोप था कि इन्होंने दंगों के दौरान एक मिलिट्री फैसिलिटी में घुसकर वहां के शस्त्रागार तक पहुंचने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इन्हें सामूहिक हत्या की साजिश रचने और हथियारों की लूट के प्रयास का दोषी पाया। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं का कहना है कि इन लोगों को जेल में प्रताड़ित किया गया और उनसे जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाया गया है।
ईरान में पिछले कुछ दिनों में हुई अन्य फांसी की सजाएं
ईरान में मौत की सजा देने का सिलसिला पिछले कुछ दिनों से काफी तेज हो गया है। प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस केस से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द ही फांसी दी जाएगी। पिछले एक हफ्ते में हुई कार्रवाई का विवरण नीचे दिया गया है:
| तारीख | नाम | आरोप |
|---|---|---|
| 30-31 मार्च 2026 | मोहम्मद तक़वी और 3 अन्य | सशस्त्र विद्रोह के आरोप |
| 2 अप्रैल 2026 | आमिर हुसैन हातेमी | सैन्य ठिकाने पर हमला |
| 4 अप्रैल 2026 | अबुलहसन मोंताज़र और वाहिद | सशस्त्र विद्रोह और प्रतिबंधित संगठन |
| 5 अप्रैल 2026 | बिग्लारी और वाहिदपरस्त | मिलिट्री कैंप पर हमला |
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार से इन फांसी की घटनाओं को रोकने की अपील की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष सुनवाई के बिना किसी को भी ऐसी सजा देना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट और सरकारी अधिकारियों ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई नई टिप्पणी नहीं की है।




