UN में ईरान की बड़ी कार्रवाई, जॉर्डन पर लगा अमेरिका का साथ देने का आरोप, सुरक्षा परिषद को सौंपा पत्र
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में जॉर्डन के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। ईरान का आरोप है कि जॉर्डन ने उसके खिलाफ हमलों के लिए अमेरिकी सेना को अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी शिकायत पेश की है।
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ईरान ने जॉर्डन पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी के अनुसार जॉर्डन ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों को मजबूती दी है। उन्होंने दावा किया कि जॉर्डन ने अपनी सीमाओं और सैन्य सुविधाओं को ईरान के खिलाफ हमले करने के लिए अमेरिका को सौंप दिया है। इरावानी ने जॉर्डन के पहले के बयानों को भ्रामक बताया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। ईरान ने अपनी शिकायत में कहा है कि इन हमलों की वजह से देश के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्रीय तनाव और नागरिकों पर इसका क्या असर हुआ?
ईरान ने आरोप लगाया है कि 28 फरवरी 2026 से जारी हमलों में अब तक 1,750 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मिशन ने भी चेतावनी दी है कि इन सैन्य कार्रवाइयों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति और खराब हो सकती है। हालांकि जॉर्डन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ईरान द्वारा किन देशों के खिलाफ शिकायत की गई है?
ईरान ने केवल जॉर्डन ही नहीं बल्कि क्षेत्र के कई अन्य देशों के खिलाफ भी संयुक्त राष्ट्र में पत्र भेजे हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका इन देशों के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर उस पर हमले कर रहा है।
| शिकायत की तारीख | देश का नाम | शिकायत का मुख्य कारण |
|---|---|---|
| 23 मार्च 2026 | जॉर्डन | अमेरिकी हमलों के लिए जमीन और हवाई क्षेत्र का उपयोग |
| 18 मार्च 2026 | UAE और बहरीन | अमेरिकी सेना को सैन्य सुविधा देने का आरोप |
| 18 मार्च 2026 | सऊदी अरब और ओमान | हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की शिकायत |
| 18 मार्च 2026 | कतर और कुवैत | अमेरिकी अभियान में कथित सहयोग |




