ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध हुआ तेज़, कुवैत में हमले के दौरान भारतीय नागरिक की मौत
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा संघर्ष अब और भी घातक होता जा रहा है। 30 मार्च 2026 को ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों के मलबे ने इज़राइल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में काफी तबाही मचाई है। इस हमले के दौरान इज़राइल के कई शहरों में सायरन बजाए गए और आपातकालीन टीमों को तुरंत काम पर लगाया गया। इस युद्ध का असर अब पड़ोसी खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है, जहां कुवैत में एक हमले के दौरान भारतीय कामगार की जान जाने की दुखद खबर आई है।
इज़राइल के इन इलाकों में हुआ मिसाइल हमला
ईरान की ओर से किए गए इन हमलों में मुख्य रूप से औद्योगिक और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है। इज़राइली सेना (IDF) और बचाव दल प्रभावित इलाकों में मलबे को हटाने और आग बुझाने के काम में जुटे हुए हैं। नुकसान की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
- Haifa: यहां की Bazan तेल रिफाइनरी के पास मिसाइल गिरने से एक गैस टैंक में आग लग गई और बिजली की सप्लाई भी कुछ समय के लिए बाधित हुई।
- Beersheba: दक्षिण के इस इलाके में एक खुले मैदान में मिसाइल गिरी, जिसकी धमक से आसपास के 100 घरों की खिड़कियां टूट गईं और 11 लोग घायल हो गए।
- Neot Hovav: यहाँ स्थित ADAMA Makhteshim प्लांट के गोदाम और मशीनों को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि यहाँ किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
- Nuclear Center: इज़राइल के मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास भी खतरे के सायरन बजाए गए।
कुवैत और सऊदी अरब पर क्या हुआ असर?
इस युद्ध का असर अब खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर भी दिख रहा है। कुवैत में एक डिसालिनेशन प्लांट (Desalination Plant) पर हुए हमले ने सबको चिंता में डाल दिया है। इसके अलावा सऊदी अरब और बहरीन भी अपनी सुरक्षा को लेकर अलर्ट पर हैं। क्षेत्र की ताजा स्थिति को नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है:
| स्थान/देश | नुकसान और स्थिति |
|---|---|
| Kuwait | डिसालिनेशन प्लांट पर हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ। |
| Saudi Arabia | सऊदी सेना ने अपनी सीमा की ओर आती 5 मिसाइलों को बीच हवा में ही मार गिराया। |
| Bahrain | फरवरी के अंत से अब तक बहरीन ने 174 मिसाइलें और 391 ड्रोन इंटरसेप्ट किए हैं। |
| Casualties | युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरान में 1900 और लेबनान में 1200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। |
ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) ने आबादी वाले इलाकों में क्लस्टर बमों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है और इसे युद्ध के नियमों का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) भी इस मामले पर रूस के अनुरोध पर चर्चा कर रही है। खाड़ी देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन हमलों की निंदा की है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है।




