Iran Ceasefire Update: ईरान ने अमेरिका और इजराइल के सामने रखी शर्त, लेबनान के बिना नहीं होगा कोई समझौता
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी ऐसे युद्धविराम समझौते को अधूरा मानेगा जिसमें लेबनान को शामिल नहीं किया जाएगा. तेहरान का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति तभी संभव है जब संघर्ष सिर्फ एक देश तक सीमित न रहे बल्कि पूरे क्षेत्र में एक साथ युद्धविराम लागू हो. ईरान ने मध्यस्थों को सूचित किया है कि किसी भी शांति वार्ता में लेबनान को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के साथ शामिल करना अनिवार्य है.
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत की मुख्य बातें
- अमेरिका ने कथित तौर पर पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है.
- ईरान के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही अपना रुख साफ करेंगे.
- ईरानी अधिकारी चाहते हैं कि समझौते के तहत क्षेत्र में सक्रिय सभी प्रतिरोध समूहों के लिए युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए.
- ईरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता बनाए रखने की भी मांग रखी है.
क्षेत्र में शांति समझौते को लेकर क्या है ताजा स्थिति?
क्षेत्रीय हालातों को देखते हुए बातचीत के प्रयास तेज हो गए हैं लेकिन कई मोर्चों पर तनाव अभी भी बना हुआ है. इजराइल के रक्षा मंत्री ने घोषणा की है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी तक के सुरक्षा क्षेत्रों और पुलों पर अपना नियंत्रण जारी रखेगी. वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे देश ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश कर रहे हैं.
| संस्था/देश | ताजा कदम और रुख |
|---|---|
| ईरान | लेबनान को समझौते में शामिल करने और क्षतिपूर्ति की मांग |
| इजराइल | लेबनान में बफर जोन का विस्तार और रणनीतिक नियंत्रण का इरादा |
| अमेरिका | तनाव कम करने के लिए 15-सूत्रीय योजना पर काम जारी |
| लेबनान | ईरानी उड़ानों पर प्रतिबंध और राजदूत को लेकर सख्त रुख की चर्चा |
ईरान की ओर से प्रेस टीवी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी भी डील में क्षेत्र के अन्य समूहों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना चाहता है. व्हाइट हाउस ने अभी तक 15-सूत्रीय योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन स्वीकार किया है कि शांति के लिए बातचीत चल रही है. अगले कुछ दिनों में मध्यस्थों की भूमिका काफी अहम होने वाली है जिससे यह साफ होगा कि क्षेत्रीय युद्ध को रोकने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है.





