Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिका और इज़राइल को दी सीधी चेतावनी, कहा युद्ध का अंत हम तय करेंगे
ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की सेना और सरकारी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इस युद्ध का अंत कब और कैसे होगा, यह ईरान ही तय करेगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने 30 मार्च 2026 को बयान दिया कि ईरान किसी भी ज़मीनी हमले का करारा जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह सैन्य मोर्चे पर फेल होने के बाद अब कूटनीति के ज़रिए अपने मकसद पूरे करने की कोशिश कर रहा है।
ℹ️: Israel ने ईरान की मिलिट्री यूनिवर्सिटी पर किया हमला, IRGC ने अमेरिका को दी बड़ी चेतावनी।
ईरान की सेना और सरकार का ताज़ा रुख क्या है?
ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका के 15-पॉइंट वाले शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है और दूसरी तरफ ईरान पर ज़मीनी हमले की योजना बना रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। ईरान ने अपनी कुछ मुख्य मांगें रखी हैं जिन्हें पूरा किए बिना वह पीछे हटने को तैयार नहीं है। इन मांगों में इलाके से अमेरिकी सैन्य अड्डों को हटाना और इज़राइल द्वारा किए गए नुकसान का हर्जाना शामिल है।
क्षेत्र में रह रहे प्रवासियों और सुरक्षा पर असर
मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ को निशाना बना सकते हैं। उन्होंने वहां काम करने वाले स्टाफ और छात्रों को कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है। इसके अलावा बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं क्योंकि वहां मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने की खबरें आई हैं।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| ईरान में हताहतों की संख्या | 281 छात्र और शिक्षक मारे गए |
| युद्ध शुरू होने की तारीख | 28 फरवरी 2026 |
| ईरान की मांग | अमेरिकी बेस का हटना और हर्जाना |
| अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया | स्पेन ने अपना हवाई क्षेत्र अमेरिकी सेना के लिए बंद किया |
| IRGC की डेडलाइन | 30 मार्च 2026 दोपहर 12 बजे तक |
ईरान के शिक्षा मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि पिछले एक महीने में हुए हमलों में सैकड़ों छात्र और शिक्षक अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने और खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने जैसी धमकियां दी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया है क्योंकि युद्ध के बढ़ने से हवाई यात्रा और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।




