15 मार्च 2026 को खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि उनका देश सऊदी अरब, कतर और ओमान के साथ मिलकर एक जॉइंट इन्वेस्टिगेशन कमिटी बनाने के लिए तैयार है। इस कमिटी का मुख्य काम हाल ही में हुए ड्रोन और हवाई हमलों की जांच करना होगा। गल्फ में रहने वाले प्रवासियों और वहां की सुरक्षा स्थिति के लिहाज से यह एक अहम फैसला है।

खाड़ी देशों में हाल के ड्रोन हमले और सऊदी अरब का एक्शन

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने 15 मार्च को रियाद और पूर्वी क्षेत्र में 10 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इन हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है।

  • IRGC का कहना है कि यह ड्रोन हमले ईरान ने नहीं किए हैं।
  • उनका आरोप है कि अमेरिका और इस्राइल ने ‘LUCAS’ नाम के डमी ड्रोन का इस्तेमाल किया है, जो ईरान के शाहेद-136 जैसे दिखते हैं ताकि ईरान को फंसाया जा सके।
  • दुबई और बहरीन के मनामा में भी कमर्शियल इमारतों पर हमले रिपोर्ट किए गए हैं।
  • सऊदी कैबिनेट ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अगुवाई में इन हमलों की निंदा की और अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

ईरान की चेतावनी और आगे के हालात

गल्फ में काम करने वाले भारतीयों और आम कामगारों के लिए मौजूदा हालात जानना बहुत जरूरी है क्योंकि यह तनाव 28 फरवरी 2026 से लगातार जारी है। ईरान ने साफ किया है कि उनके निशाने पर सिर्फ अमेरिकी बेस हैं।

  • ईरान ने UAE के तीन बड़े बंदरगाहों को खाली करने की चेतावनी दी है अगर वहां अमेरिकी संपत्ति या जहाज मौजूद हैं।
  • अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमला होता है, तो वह इलाके में मौजूद अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाएगा।
  • ईरान ने तुर्की के साथ भी एक अलग कमिटी बनाने का प्रस्ताव रखा है ताकि एयरस्पेस की सुरक्षा को जांचा जा सके।
  • तनाव के बावजूद ईरान और खाड़ी देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत चालू है और चैनल बंद नहीं हुए हैं।