US Central Command का बड़ा दावा, ईरान की सैन्य ताकत और प्रभाव को खत्म करने का अभियान जारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ताजा बयान जारी करते हुए कहा है कि वे ईरान के सैन्य प्रभाव को उसकी सीमाओं से बाहर बढ़ने से रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियानों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी कमजोर कर दिया है। हाल ही में हुए हमलों में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर की मौत की भी पुष्टि हुई है। पेंटागन अब इस अभियान को निर्णायक मोड़ पर ले जाने की तैयारी में जुटा है।
ईरान की सैन्य क्षमता को अब तक कितना नुकसान हुआ है?
एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान में 10,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। इन हमलों की वजह से ईरान की सैन्य उत्पादन सुविधाओं का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह बर्बाद हो गया है। ईरानी नौसेना के 92 प्रतिशत बड़े जहाज अब समुद्र में काम करने लायक नहीं बचे हैं, जिससे उनकी समुद्री ताकत लगभग खत्म हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की तरफ से होने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों में भी 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान के पूरे सैन्य निर्माण तंत्र को समाप्त करना है।
मौजूदा स्थिति और हालिया घटनाक्रमों की सूची
क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में कई बड़े हमले और रक्षात्मक कार्रवाई देखने को मिली हैं। नीचे दी गई तालिका में मुख्य घटनाओं की जानकारी दी गई है:
| तारीख | मुख्य घटनाक्रम |
|---|---|
| 26 मार्च 2026 | इजरायली हवाई हमले में IRGC नौसेना कमांडर अलीरेज़ा तंगसीरी की मौत हुई |
| 27 मार्च 2026 | इजरायल ने तेहरान के भीतर ईरानी शासन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया |
| 27 मार्च 2026 | सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में 4 ईरानी ड्रोनों को मार गिराया गया |
| 27 मार्च 2026 | पेंटागन ने युद्ध में ‘आखिरी प्रहार’ के लिए सैन्य विकल्प तैयार किए |
क्या कूटनीति से निकलेगा इस तनाव का हल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अप्रैल तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने का फैसला किया है ताकि बातचीत को मौका मिल सके। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान के सामने 15 सूत्री शांति प्रस्ताव रखा है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव ने कहा है कि सेना बातचीत के साथ-साथ बमबारी का विकल्प भी खुला रखेगी। दूसरी तरफ, पेंटागन के भीतर टॉमहॉक मिसाइलों के भंडार में आई कमी को लेकर चिंता जताई जा रही है क्योंकि युद्ध में इनका भारी इस्तेमाल हुआ है। आने वाले कुछ दिन इस संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।




