ईरान में 10,000 घर और इमारतें तबाह, रेड क्रिसेंट ने जारी किया अमेरिकी हमलों का डरावना आंकड़ा
ईरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) ने 8 मार्च 2026 को अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के कारण ईरान में भारी तबाही हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 9,669 नागरिक इकाइयां पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गई हैं। IRCS के प्रमुख Pir-Hossein Kolivand ने पुष्टि की है कि इन हमलों में आम लोगों के घर, दुकानें और अस्पताल सीधे तौर पर निशाना बने हैं। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था और अब इसका असर आम जनजीवन पर गहरा होता जा रहा है।
🚨: UAE पर हमले में मरने वालों की संख्या 4 हुई, दुबई के Al Barsha में मलबे से गई एक जान।
कहां हुआ है सबसे ज्यादा नुकसान?
IRCS के आंकड़ों के मुताबिक, हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान रिहायशी इलाकों में हुआ है। जमीनी स्तर पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं। अस्पतालों और स्कूलों पर हुए हमलों को लेकर रेड क्रिसेंट ने इसे जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन बताया है। तेहरान के दक्षिण में स्थित तेल डिपो और Isfahan Airport पर भी भारी नुकसान की खबर है।
नुकसान का पूरा विवरण:
- रिहायशी मकान: 7,943 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए हैं।
- व्यापारिक केंद्र: 1,617 दुकानें और सर्विस सेंटर तबाह हुए हैं।
- अस्पताल: 32 मेडिकल सेंटर पर हमला हुआ है, जिसमें तेहरान के Motahhari और Gandhi Hospitals शामिल हैं।
- स्कूल: 65 शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुंचा है।
- राहत कार्य: रेड क्रिसेंट की 15 एम्बुलेंस और राहत गाड़ियां हमलों में नष्ट हो गई हैं।
मौतों का आंकड़ा और बढ़ती महंगाई
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 28 फरवरी से अब तक कुल 1,230 लोगों की मौत हुई है। इसमें दुखद बात यह है कि मरने वालों में 200 बच्चे और 200 महिलाएं शामिल हैं। हमलों का असर न सिर्फ जान-माल पर बल्कि लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल की सप्लाई बाधित हुई है।
ताजा हालात और आर्थिक असर:
- कच्चा तेल: Brent Crude की कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 83 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
- महंगाई: एशिया से यूरोप तक हवाई माल ढुलाई (Airfreight) का खर्च 45% बढ़ गया है।
- पानी की किल्लत: Qeshm Island पर पानी साफ करने वाले प्लांट (Desalination plant) पर हमला हुआ है, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।
- औद्योगिक नुकसान: 7-8 मार्च को हुए हमलों में तेल स्टोरेज फैसिलिटी में आग लगने से 4 टैंकर ड्राइवरों की भी मौत हुई है।





