Iran Strait of Hormuz Alert: ईरान ने दी दुनिया को खुली चेतावनी, तेल के सबसे बड़े समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए लागू किया नया नियम
10 मार्च 2026 को ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने कहा है कि यह रास्ता या तो सबके लिए राहत का रास्ता होगा, या फिर युद्ध का सपना देखने वालों के लिए घुटन का कारण बनेगा. यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर कड़े हमले करने की बात कही थी. गल्फ देशों में रहने वाले भारतीयों और व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि जहाजों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए क्या है नया नियम
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए नई शर्तें लागू कर दी हैं. 11 मार्च 2026 से अरब और यूरोपीय देशों को इस रास्ते से गुजरने की पूरी आज़ादी दी जाएगी लेकिन इसके लिए उन्हें ईरान की एक बड़ी शर्त माननी होगी.
- अरब और यूरोपीय देशों को अपने देश से अमेरिका और इजरायल के राजदूतों को बाहर निकालना होगा.
- चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फाजली ने स्पष्ट किया है कि रास्ते को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है बल्कि सुरक्षा कारणों से कुछ नियम लगाए गए हैं.
- IRGC ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल के हमले जारी रहे तो यहां से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा.
वैश्विक व्यापार और शिपिंग कंपनियों पर असर
इस तनाव के कारण दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है. इस समय ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का 11वां दिन चल रहा है और अमेरिका और इजरायल के हमले लगातार जारी हैं.
- Maersk, MSC और Hapag-Lloyd जैसी बड़ी कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाजों को रोक दिया है.
- लंदन P&I क्लब जैसी कई कंपनियों ने फारस की खाड़ी के लिए जहाजों का बीमा कवर रद्द कर दिया है.
- कतर में LNG गैस का उत्पादन प्रभावित होने की खबर है और सऊदी अरब मिसाइल हमलों को रोक रहा है.
- अमेरिका की नेवी तेल टैंकरों को सुरक्षा देने की तैयारी में है, जबकि ईरान ने इसका जवाब देने के लिए अपने ड्रोन और मिसाइल तैनात कर दिए हैं.
इस पूरे विवाद के कारण दुनिया भर में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के सामान खाड़ी देशों में फंस गए हैं. गल्फ में काम करने वाले प्रवासियों को भी बढ़ती महंगाई और सामानों की सप्लाई में देरी का सामना करना पड़ सकता है.





