ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। 6 अप्रैल 2026 को ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खमेनेई ने अमेरिकी धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह कर उसे ‘पत्थर युग’ में भेजने की बात कही थी, जिसके बाद तेहरान ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर झुकने वाला नहीं है। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण तेल की कीमतों पर भी बड़ा असर देखा जा रहा है।

ईरान ने क्यों ठुकराया 45 दिनों का सीजफायर प्रस्ताव?

ईरान ने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए 45 दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। ईरान की मांग है कि युद्ध का पूरी तरह से अंत हो और उसे भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ ठोस गारंटी दी जाए। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि वे केवल अस्थाई समाधान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेंगे। ईरान के इस फैसले से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है क्योंकि होर्मुज के रास्ते होने वाली तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह बाधित है।

ताजा हमलों में हुई तबाही और महत्वपूर्ण जानकारी

पिछले 24 घंटों के भीतर अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी की है। इन हमलों में तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी और दक्षिण पार्स पेट्रोकेमिकल प्लांट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया है। ईरान की सेना ने पुष्टि की है कि इन हमलों में उनके कई बड़े अधिकारी मारे गए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है क्योंकि युद्ध की स्थिति सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

प्रमुख घटना विवरण
सुप्रीम लीडर का बयान अमेरिका की पत्थर युग वाली धमकी का विरोध किया
सीजफायर प्रस्ताव ईरान ने 45 दिन का प्रस्ताव ठुकराया
मारे गए अधिकारी Maj. Gen. Majid Khademi और Asghar Bakeri
निशाना बने ठिकाने शरीफ यूनिवर्सिटी और साउथ पार्स प्लांट
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान ने इसे बंद रखने का फैसला बरकरार रखा
ट्रंप की डेडलाइन 6 अप्रैल 2026 की समय सीमा समाप्त हुई