नेपाल सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व PM केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को 9 अप्रैल तक छोड़ने का दिया आदेश
नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सोमवार 6 अप्रैल 2026 को अदालत ने कहा कि इन दोनों नेताओं को 9 अप्रैल 2026 तक रिहा कर दिया जाए। यह फैसला उस समय आया है जब उनकी वर्तमान हिरासत की अवधि 9 अप्रैल को समाप्त हो रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच पूरी नहीं होती है, तो उन्हें और अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने रिहाई को लेकर क्या शर्तें रखी हैं?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बिनोद शर्मा और सुनील कुमार पोखरेल की पीठ ने यह आदेश जारी किया है। हालांकि कोर्ट ने उनकी पत्नियों द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी वर्तमान गिरफ्तारी अवैध नहीं थी। लेकिन साथ ही अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 9 अप्रैल तक अपनी जांच पूरी करें। यदि इस तारीख तक जांच पूरी नहीं होती है या कोई औपचारिक आरोप तय नहीं किए जाते हैं, तो ओली और लेखक को कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा करना होगा।
किन आरोपों की वजह से हुई थी नेताओं की गिरफ्तारी?
केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को 28 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर सितंबर 2025 में हुए जेन ज़ेड (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप हैं। एक जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई की गई थी, जिसमें उन प्रदर्शनों के दौरान 76 लोगों की मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार माना गया था। वर्तमान में केपी शर्मा ओली का इलाज त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में चल रहा है, जहाँ स्वास्थ्य कारणों से उनसे पूछताछ की जा रही है।
| महत्वपूर्ण घटना | तारीख |
|---|---|
| जेन ज़ेड विरोध प्रदर्शन | 8-9 सितंबर 2025 |
| नेताओं की गिरफ्तारी | 28 मार्च 2026 |
| सुप्रीम कोर्ट का आदेश | 6 अप्रैल 2026 |
| रिहाई की अंतिम समय सीमा | 9 अप्रैल 2026 |




