Iran US Relations: अमेरिका ने ईरान को दिया 15 सूत्री शांति का नया प्लान, ईरानी विदेश मंत्री ने दिया बड़ा बयान
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक जानकारी सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से 15 सूत्री प्रस्ताव मिला है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है और न ही दोनों देशों के बीच किसी तरह की औपचारिक बातचीत शुरू हुई है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के संदेश सीधे और क्षेत्रीय देशों के माध्यम से उन तक पहुंच रहे हैं।
अमेरिका के इस 15 सूत्री प्रस्ताव में क्या मुख्य बातें शामिल हैं?
अमेरिका ने पाकिस्तान जैसे देशों के माध्यम से ईरान को एक एक्शन प्लान भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना और कुछ पुरानी पाबंदियों को फिर से लागू करना है। इस प्रस्ताव में शामिल प्रमुख बिंदु नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:
| प्रमुख क्षेत्र | अमेरिकी प्रस्ताव की शर्तें |
|---|---|
| परमाणु कार्यक्रम | परमाणु क्षमताओं को खत्म करना और यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाना। |
| मिसाइल प्रोग्राम | ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नई सीमाएं तय करना। |
| क्षेत्रीय सुरक्षा | हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए खोलना। |
| समर्थन | विभिन्न समूहों और मिलिशिया को दी जाने वाली मदद बंद करना। |
| राहत | इन शर्तों को मानने पर ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देना। |
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने इस मुद्दे पर और क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्री ने साफ किया कि अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर ईरान का रुख काफी सावधान है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff के साथ कुछ संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हुआ है, लेकिन इसे आधिकारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ईरान की ओर से रखे गए कुछ मुख्य पक्ष इस प्रकार हैं:
- ईरान का कहना है कि पिछली कड़वी यादों के कारण वाशिंगटन पर उनका भरोसा शून्य है।
- ईरान केवल युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि वह युद्ध का पूरी तरह अंत और भविष्य के लिए सुरक्षा गारंटी मांग रहा है।
- ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग रखी है।
- मीडिया में चल रही उन खबरों को गलत बताया गया है जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अपना कोई 5 सूत्री काउंटर-प्रस्ताव दिया है।
- सभी संदेशों का जवाब केवल जरूरत पड़ने पर ही दिया जाता है और इसकी निगरानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल करती है।




