ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा दावों का युद्ध, पायलट रेस्क्यू मिशन पर ईरान ने कहा मिशन फेल, ट्रंप बोले सब ठीक हैं
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। इसफाहन में एक गिरे हुए अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए चलाए गए मिशन पर दोनों देशों की तरफ से अलग-अलग बयान आए हैं। ईरान के IRGC प्रवक्ता ने इस ऑपरेशन को पूरी तरह से फेल बताया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उनके दोनों पायलट सुरक्षित वापस आ चुके हैं। यह घटना 5 अप्रैल 2026 की है, जिसने इलाके में हलचल बढ़ा दी है।
ईरान की सेना ने किन विमानों को गिराने का दावा किया?
ईरानी सेना और IRGC के अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका का यह रेस्क्यू मिशन दक्षिणी Isfahan में नाकाम कर दिया गया। ईरान ने दावा किया है कि उन्होंने इस कार्रवाई में अमेरिका के कई सैन्य विमानों को मार गिराया है। ईरान की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार तबाह हुए विमानों की जानकारी इस प्रकार है:
- दो C-130 सैन्य परिवहन विमान
- दो Black Hawk हेलीकॉप्टर
- एक MQ-9 ड्रोन
- एक इजरायली Hermes 900 ड्रोन
ईरान ने इस घटना की तुलना 1980 के Operation Eagle Claw से की है। इसके अलावा, ईरानी मीडिया में खबर आई कि कोहगिलुये और बोयर-अहमद प्रांत में हुए हमलों में पांच लोग मारे गए हैं, हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने इन मौतों का सीधा संबंध पायलट की तलाश से होने से इनकार किया है। ईरान ने लापता क्रू मेंबर को ढूंढने वाले के लिए 60,000 डॉलर के इनाम की भी घोषणा की थी।
अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप का इस पर क्या रुख है?
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मिशन को एक चमत्कार बताया है। उन्होंने पुष्टि की है कि Air Force के दूसरे अधिकारी को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है और अब दोनों पायलट सही-सलामत हैं। ट्रंप के अनुसार, इस मिशन में दर्जनों खतरनाक हथियारों से लैस विमान शामिल थे और इसे बहुत ही बहादुरी से अंजाम दिया गया।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान एक भी अमेरिकी सैनिक न तो मारा गया और न ही घायल हुआ है। पायलट को कुछ चोटें आई थीं, लेकिन अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। यह पायलट शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को F-15E जेट के गिरने के बाद ईरान के मुश्किल पहाड़ी इलाकों में छिपा हुआ था। फिलहाल दोनों देशों के बीच इन दावों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।




