ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी करने का ऐलान किया है, जबकि ईरान का कहना है कि Strait of Hormuz किसी एक देश का नहीं बल्कि सबका है। भारत ने इस बीच दोनों देशों के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम का स्वागत किया है।

ईरान और अमेरिका के बीच क्या विवाद है?

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि Abdul Majid Hakeem Ilahi ने साफ कहा कि Strait of Hormuz सभी देशों का है और अमेरिका इस पर अपना हक नहीं जता सकता। उन्होंने Donald Trump की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कुछ नहीं कर सकता क्योंकि ईरान का शासन बहुत मजबूत है। दूसरी तरफ, Donald Trump ने ऐलान किया कि उनकी नौसेना उन जहाजों को रोकेगी जिन्होंने ईरान को रास्ता पार करने के लिए टोल दिया है।

अब तक क्या-क्या हुआ और भारत का क्या कहना है?

इस पूरे विवाद में पिछले कुछ समय में कई बड़ी घटनाएँ हुई हैं, जिन्हें इस टेबल में देखा जा सकता है:

तारीख क्या हुआ
12 मार्च 2026 Mojtaba Khamenei ने Strait of Hormuz को बंद रखने का आदेश दिया
5 अप्रैल 2026 Donald Trump ने ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी दी
8 अप्रैल 2026 अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा हुई
13 अप्रैल 2026 US Central Command ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू की

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया है। भारत ने जोर दिया है कि बातचीत और डिप्लोमेसी से ही हल निकलेगा ताकि व्यापार और जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के चलती रहे।

पाकिस्तान की भूमिका और ईरान की शर्तें क्या हैं?

इस विवाद को सुलझाने और युद्धविराम कराने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और Field Marshal Asim Munir ने अहम भूमिका निभाई। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने संकेत दिया है कि वे अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपने रवैये में बदलाव करना होगा और ईरान के अधिकारों का सम्मान करना होगा।